केजरीवाल सरकार को कोर्ट की फटकार, सालों से बन रही योजनाएं, जमीन पर कुछ नहीं दिखाता

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में लगातार विकराल होती वायु प्रदूषण की समस्या पर केजरीवाल सरकार को फटकार लगा दी है। हाई कोर्ट ने केंद्र,दिल्ली सरकार,नगर निगम,डीडीए व अन्य सिविक एजेंसियों को जमकर फटकार लगाते हुए सरकार के हलफनामे पर नाराजगी जताते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार सालों से योजनाएं पेश कर रही है,लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। न्यायमूर्ति रविंद्र भट व न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने दिल्ली सरकार व सिविक एजेंसियों को आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर वह पांच इसतरह के कारगर सुझाव दें,जिससे प्रदूषण की समस्या का समाधान किया जा सके।

हाई कोर्ट ने कहा कि इन उपायों के साथ समयसीमा भी दी जाए कि यह कब तक पूरा होने वाले है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी। हाई कोर्ट ने तीनों निगम आयुक्तों को अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने या फिर खुद कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। ग्रीन सेस से एकत्रित 700 करोड़ रुपये से 500 इलेक्ट्रिक व दो हजार सीएनजी बसें खरीदने की दिल्ली सरकार की दलील पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ग्रीन सेस का पैसा केवल दिल्ली में पेड़ लगाने पर ही खर्च किया जा सकता है।

कोर्ट ने फटकार लगाते हुए दिल्ली सरकार से कहा,आप समझ रहे हैं कि क्या कह रहे हैं। बसों की संख्या बढ़ाकर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुधार करना तो आपका काम है। आप इसे प्रदूषण से कैसे जोड़ रहे हैं। सरकार के तमाम बिंदुओं पर बैठक करने व फैसले लेने के तर्क पर भी कोर्ट ने फटकार लगाई और कहा कि अधिकारियों की बैठक,व हलफनामों से अब अदालत ऊब चुकी है। आप लोग सीधे बताएं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के नाम पर एजेंसियां फ्लाईओवर के नीचे पेड़ लगवा देती हैं,लेकिन हकीकत यह है कि वर्ष 2002 से अब तक प्रदूषण कम करने के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ।

कोर्ट ने सरकार से पूछा कि उसकी नजर में वन क्षेत्र क्या है। वन क्षेत्र भाटी माइंस, रिज एरिया में तो अतिक्रमण व अवैध कब्जा है। कोई सरकार व एजेंसी प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली एनसीआर की आबोहवा खराब होने के लिए हरियाणा व पंजाब के खेतों में जलाई जाने वाली पराली को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है। पंजाब कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक मनमोहन कालिया का कहना है कि किसान पराली जलाने की जगह तकनीक का इस्तेमाल करें तो इससे फसल की पैदावार बढ़ेगी और वायु प्रदूषण भी नहीं होगा।

बता दे कि आबोहवा को प्रदूषित होने से बचाने और फसल अवशेषों के जलाने पर रोक’ विषय पर कनॉट प्लेस में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे मनमोहन कालिया ने कहा कि हम अधिक से अधिक किसानों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे फसल कटाई के बाद खेत का उपचार मशीन के माध्यम से करते हुए फसलों के अनुपयोगी डंठल (पराली) का सही प्रबंधन करें। पंजाब के पटियाला जिले के कलरमजरी गांव में पंजाब सरकार का कृषि विभाग खेतों की जुताई और फसलों की कटाई में चॉपर के साथ कंबाइन हार्वेस्टर,रेक,बेलर, हैपी सीडर और एमबी प्लाऊ का इस्तेमाल कर रहा है। इससे फसल अवशेषों का सदुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होती है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper