केदारनाथ : हादसे के पांच वर्ष बाद पटरी पर लौटी जिंदगी

केदारनाथ: उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में वर्ष 2013 के जून माह में हिमालयी सुनामी आने के पांच साल बीतने के बाद अब बाबा शिव के केदरनाथ धाम की सूरत बदल गई है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से शुरू किए गए पुनर्निर्माण अभियान की वजह से पांच साल पहले पूरी तरह बर्बाद हो चुकी केदार घाटी की रौनक वापस लौट आई है। इन दिनों उत्तराखंड में मानसून सक्रिय है। इसके बावजूद केदारनाथ धाम में पर्यटकों और श्रदालुओं की आवाजाही बनी हुई है।

केदारनाथ में पुनर्निर्माण का कार्य तेज गति से चल रहा है। करीब 11660 फ़ीट पर स्थित हिमालय की गोद में बसे केदरनाथ धाम में ज़िन्दगी इतनी आसान नहीं है। यहां का मौसम पल- पल बदलता है और तापमान शून्य से नीचे तक चला जाता है। वर्ष 2013 के जून माह में आई आपदा के बाद केदारनाथ घाटी और केदारनाथ धाम की शक्ल भयावह हो गयी थी।

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चारों तरफ तबाही का मंज़र पसर गया था। हर जगह भवनों में टूट-फूट हो गई थी। आपदा के कई महीनों बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए थे। सोनप्रयाग से केदारनाथ को जोड़ने वाला एक मात्र रास्ता टूट गया था। हालांकि, पांच साल की अथक मेहनत के बाद केदारनाथ का पुनर्निर्माण हो पाया है। यहां नए रास्ते बनाए गए हैं। अब यहां फिर से खूब चहल-पहल है। हालांकि, इन पांच सालों में प्रदेश ने तीन मुख्यमंत्रियों विजय बहुगुणा, हरीश रावत और त्रिवेंद्र रावत का कार्यकाल देखा है।

मौजूदा सरकार ने केदारनाथ रिकंस्ट्रक्शन को अपनी प्राथमिकता में रखा है और इधर प्रधानमंत्री कार्यालय भी कामों पर लगातार नज़र बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल केदारनाथ के कपाट बंद होने के मौके पर बताया था कि 90 के दशक में वह गरुड़ चट्टी में रह चुके हैं। गरुड़ चट्टी दरअसल केदरनाथ धाम के पास ही है पर आपदा के दौरान यहाँ का रास्ता पूरी तरह से जमींदोज़ हो गया था।

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