केरल और तमिलनाडु में भाजपा का आधार नहीं

तिरुवनंतपुरम: केरल में बीजेपी हालांकि कांग्रेस को पछाड़ कर सत्तारूढ़ वाममोर्चे का विकल्प बनना चाह रही है, मगर त्रिपुरा की तरह वहां राह आसान नहीं है। इसके बावजूद बीजेपी के वोटों की संख्या बढ़ रही है और कुछ जातीय जमातों से उसने गठबंधन भी किया है। आम चुनाव से पहले बीजेपी और भी हाथ-पांव मारकर लोकसभा की एकाध सीट जीतने की पूरी कोशिश करेगी। अलबत्ता कांग्रेस नीत गठबंधन के वहां अच्छे आसार हैं। कांग्रेस देशव्यापी गठबंधन में कामयाब रही तो उसे बीजेपी के विकल्प के रूप में सेकुलर वोटरों का एकमुश्त समर्थन उसे मिल सकता है।

हालांकि माकपा नीत मोर्चा भी राज्य में अपनी सरकार के बूते लोकसभा की 21 में अधिक से अधिक सीट जीतना चाहेगा। बाकी बचा तमिलनाडु तो वहां सवा साल पहले जयललिता की मृत्यु के बाद से ही राजनीतिक अनिश्चितता है। पलानिसामी और पनीरसेल्वम हालांकि बीजेपी के समर्थन से अन्नादमुक सरकार चल रहे हैं। मगर शशिकला उन्हें अस्थिर करने में जुटी हैं। अन्नाद्रमुक से निष्कासित उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरन ने जयललिता की सीट आरके नगर से विधानसभा उपचुनाव जीतकर नई पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम बना ली है। दिनाकरन ने उपचुनाव 40,707 वोट से जीता है। तमिलनाडु की राजनीति में निर्दलीय जीतने वाले वह पहले उम्मीदवार हैं।

मदुरै में पिछले महीने तमिल अभिनेता कमल हासन ने भी मक्कल नीधि मय्यम नाम से नई पार्टी बना ली है। इसका मतलब है जन न्याय केंद्र। कमल हासन की तरह तमिल सुपरस्टार रजनीकांत भी राजनीतिक दल बनाने की घोषणा कर चुके हैं। अपनी राजनीतिक शैली को आध्यात्मिक बताकर उन्होंने बीजेपी के साथ जाने की अटकलें लगवा दी हैं। रजनीकांत के प्रशंसकों की संख्या राज्य में कमला हासन से कहीं अधिक है। इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि की द्रमुक, वाइको की एमडीएमके, रामदॉस की पीएमके, फिल्म अभिनेता विजयकांत की डीएमडीके, ठोल तिरूमावलावन की वीसीके, मूपनार की टीएमसी आदि दल पहले से तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय हैं।

एनडीए ने यहां अन्नाद्रमुक की आंधी के बावजूद 2014 में दो सीटें जीती थीं। उनमें प्रदेश अध्यक्ष पी. राधाकृष्णन और पीएमके के डॉ. रामदॉस शामिल थे। जाहिर है कि 2019 में बीजेपी तमिलनाडु और पुदुच्चेरी की कुल 40 सीट में से अधिकतम सीटें जीतने की कोशिश करेगी। डीएमके भी मोटा हाथ मारने के फेर में है, मगर बीजेपी के दांव और नए दलों के चलते चुनाव का रूख बदल भी सकता है। डीएमके पिछले 14 साल से कांग्रेस नीत यूपीए में शामिल है। मोदी की करूणानिधि से मुलाकात के बाद इस बारे में अनिश्चितता है। कुल मिलाकर 2019 के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए ही दक्षिण भारत महत्वपूर्ण रहेगा।

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