कैसे हुई पितृपक्ष की शुरुआत? महाभारत काल में छिपा श्राद्ध का पौराणिक रहस्य

नई दिल्ली: श्राद्ध का महीना शुरू हो गया है, आने वाले दिन पितरों की याद में, उनके लिए दान कर, तर्पण कर बिताए जाएंगे । ये समय ऐसा समय है जब हम अपने पूर्वजों को याद कर सकते हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए साल के इन कुछ दिनों में विशेष पूजा का आयोजन किया जा सकता है । ऐसी मान्‍यता है कि जो परिजन अपनी देह त्यागकर चले जाते हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए किया जाने वाला तर्पण श्राद्ध कहलाता है । ये सच्‍ची श्रद्धा से किया जाना चाहिए । ये भी मान्‍यता है कि मृत्यु के देव यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वो परिजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें ।

कौन कहलाए जाते हैं पितर?
परिवार में जिस किसी भी मृत्‍यु हो गई है, चाहे वो बड़े – बुजुर्ग हों, विवाहित हों या अविवाहित हों, बच्चे हों या फिर किसी भी उम्र में मृत्‍यु को प्राप्‍त हुए हों, वे पितर ही कहलाए जाते हैं । शास्‍त्रों के अनुसार पितरों को प्रसन्न करने से घर में भी सुख शांति आती है । पितृपक्ष में सभी लोगों को पूर्वजों का स्मरण कर उनके लिए तर्पण करना चाहिए, यदि आप उनकी मृत्‍यु ति‍थि नहीं जानते, तो आश्विन अमावस्या को तर्पण कर सकते हैं, इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है ।

श्राद्ध से जुड़ी पौराणिक कथा
श्रराद्ध पक्ष के पीछे की मान्यता क्‍या है, आखिर कैसे इसे शुरू किया गया, क्‍यों पितरों को संतुष्‍ट करना जरूरी माना गया है । दरअसल इसके पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक मान्‍यता है । जिसके अनुसार महाभारत के युद्ध में दानवीर कर्ण का निधन हो गया और उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंच गई, तो उन्हें नियमित भोजन की बजाय खाने के लिए सोना और गहने दिए गए । इस बात से निराश होकर कर्ण की आत्मा ने इंद्र देव से इसका कारण पूछा । तब इंद्र ने कर्ण को बताया कि आपने अपने पूरे जीवन में सोने के आभूषणों को दूसरों को दान किया लेकिन कभी भी अपने पूर्वजों को भोजन दान नहीं दिया । तब कर्ण ने उत्तर दिया कि वो अपने पूर्वजों के बारे में नहीं जानता है और उसे सुनने के बाद, भगवान इंद्र ने उसे 15 दिनों की अवधि के लिए पृथ्वी पर वापस जाने की अनुमति दी ताकि वो अपने पूर्वजों को भोजन दान कर सके । इन्‍हीं 15 दिनों की अवधि को पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है ।

नहीं करनी चाहिए ये गलतियां
पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध का कार्य विधि-विधान के साथ करें । पितृ पक्ष के दौरान दरवाजे पर आए किसी भी शख्‍स का अनादर ना करें, व्‍यक्ति ही नहीं किसी जानवर को भी भूखा ना भेजें । मान्‍यता है कि पूर्वज किसी भी रूप में हमारे सामने आ सकते हैं । पितृ पक्ष में कोई भी नया सामान नहीं खरीदना चाहिए । खास बात जो ध्‍यान रखें वो ये कि पितृ पक्ष में तर्पण करने वाले आदमी को अपने दाढ़ी और बाल नहीं बनवाने चाहिए । पितरों को लोहे के पात्र में जल ना दें, ऐसा करने से आपके पितर नाराज हो जाएंगे । पीतल, फूल या तांबे के बर्तन में जल दें । पितृ पक्ष के दौरान मांस और मदिरा का सेवन वर्जित है ।

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