कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के लिए छात्र तैयार, शिक्षक चाहते हैं अभी किया जाए कुछ और इंतजार

नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों को कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पास करना होगा। दिल्ली के स्कूलों और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के एक बड़ा तबके का कहना है कि कॉमन एंट्रेंस टेस्ट स्कोर लागू करने से पहले छात्रों को और समय दिया जाना चाहिए। शिक्षकों की मांग है की अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूसीईटी इस सत्र की की बजाए अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाना चाहिए था।

दिल्ली के करीब 400 प्राइवेट स्कूलों की एक संयुक्त संस्था ‘नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस’ का कहना है कि इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से दखल की मांग की गई है। संस्था ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को इस संबंध में पत्र लिखा है जिसमें मांग की गई है कि विश्वविद्यालयों के अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट को 2022-23 के शैक्षणिक वर्ष में लागू न किया जाए। प्राइवेट स्कूलों की संस्था का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अगले वर्ष नए शैक्षणिक सत्र से यह नियम लागू कर सकता है जिससे छात्रों को सुविधा होगी और इस संबंध में छात्र स्वयं को तैयार भी कर सकेंगे।

हालांकि निजी स्कूलों की अपील का कोई बहुत बड़ा प्रभाव पड़ना मुश्किल दिखाई देता है। दरअसल यूजीसी के निर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने सीयूसीईटी यानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंटरेंस टेस्ट को मंजूरी दे दी है।

इस प्रावधान के अंतर्गत 12वीं कक्षा में अर्जित किए गए अंकों के आधार पर अब कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलेगा। कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए 2022-23 के शैक्षणिक सत्र में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पास करना होगा।

काउंसिल की बैठक में नौ सदस्य इस नए प्रावधान के विरोध में थे लेकिन बहुमत के आधार पर विश्वविद्यालय एकेडमिक काउंसिल ने इस प्रस्ताव को स्वीकृत कर लिया है।

बड़ी संख्या में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी इस नए बदलाव का समर्थन कर रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली विश्वविद्यालय में सीयूसीईटी के माध्यम से स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले दिए के निर्णय का स्वागत किया है। अभाविप का मत है कि सीयूसीईटी के लागू होने से दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए सभी राज्यों से आने वाले छात्रों को समान अवसर मिलेगा तथा दाखिला प्रक्रिया भी आसान होगी।

छात्र संगठन के मुताबिक अलग-अलग परीक्षा बोडरें की मूल्यांकन पद्धति में अंतर होने के कारण बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांको से जो भिन्नता उत्पन्न होती थी,वह भी इस एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से दूर होगी।

अभाविप ने यूजीसी से यह भी मांग की है कि एनटीए द्वारा इस प्रवेश परीक्षा के लिए मॉक टेस्ट भी शुरू कराए जाएं ताकि छात्रों को परीक्षा के स्वरूप को समझने में आसानी हो सके। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के समूह ने प्रवेश परीक्षा को सर्वश्रेष्ठ बताया है।

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