कोयला खनन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, कल पीएम मोदी करेंगे वाणिज्यिक कोल माइनिंग की नीलामी की शुरुआत

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये एक कार्यक्रम में कोयला खदानों के वाणिज्यिक खनन के लिये नीलामी की शुरूआत करेंगे। सूत्रों के अनुसार वाणिज्यिक खनन के लिये 41 कोयला ब्लाक को बिक्री के लिए रखा जाएगा। कोयला मंत्रालय ने कहा कि नीलामी कार्यक्रम ‘‘उन्मुक्त कोयेला क्षेत्र : आत्मनिर्भर भारत के लिये नई उम्मीद’’…विषय पर केंद्रित होगा। इससे पहले, कोयला मंत्री प्रहालाद जोशी ने कहा था कि वाणिज्यिक खनन की अनुमति देकर सरकार ने क्षेत्र को निवेश के लिए खोल दिया है।

मंत्री ने वाणिज्यिक कोयला खनन की अनुमति को क्षेत्र में अबतक का सबसे बड़ा सुधार करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कोयले के मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने के लिये कई पाबंदियां भी हटायी गयी हैं। मंत्रालय ने कहा कि सरकार के आत्म भारत अभियान की शुरूआत के साथ कोयला और खनन क्षेत्र ने संरचनात्मक सुधारों के जरिये देश को कोयला खनन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है। वाणिज्यि कोयला खनन नीलामी पूरी तरह अलग होगा। इसमें किसी प्रकार की पाबंदी नहीं होगी। प्रस्तावित नीलामी व्यापार अनुकूल नियम एवं शर्तों पर आधारित है। इसमें शुरूआती राशि कम किया गया है, रॉयल्टी को लेकर शुरूआती राशि का समायोजन और उदार दक्षता मानदंड रखे गये हैं। इन सबका उद्देश्य कोयला खदानों के परिचालन में लचीलापन लाना है।

इसके अलावा स्वत: मार्ग से 100 प्रतिशत एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की अनुमति दी गयी है और युक्तिसंगत वित्तीय शर्तों तथा राष्ट्रीय कोयला सूचकांक पर आधारित राजस्व हिस्सेदारी मॉडल अपनाया गया है। सफल बोलीदाताओं को कोयला उत्पादन के मामले में लचीलापन उपलब्ध होगा और पहले उत्पादन करने और कोयले से गैस बनाने को लेकर प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। खदानों की नीलामी तीन श्रेणी…छोटे, मझोले और बड़े…में होगी। सरकार ने पिछले महीने राजस्व हिस्सेदारी आधार पर वाणिज्यिक खनन के तौर-तरीकों को पिछले महीने मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में इस आशय का निर्णय किया गया था। सीसीईए द्वारा मंजूर तौर-तरीके के अनुसार बोली मानदंड राजस्व हिस्सेदारी पर आधारित होगा। बोलीदाताओं को सरकार को देय राजस्व में प्रतिशत हिस्सेदारी के भुगतान के आधार पर बोली लगानी होगी।

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