कोरोना के कहर से कहार रही दिल्ली, पढ़िए पांच दर्दनाक कहानियां

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कहर से पूरा देश परेशान है, लेकिन देश का दिल कही जाने वाली राजधानी दिल्ली में हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं। यहां पिछले कुछ दिनों में संक्रमण की दर तेजी से बढ़ी है। दिल्ली में जांच कराने वाला हर तीसरा शख्स कोरोना वायरस से संक्रमित मिल रहा है। अब तो दिल्ली में कोरोना वायरस से निपटने के इंतजाम पर भी सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार को तो सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में मरीजों और अस्पतालों की भयावह हालात, कम टेस्टिंग पर सवाल उठाए। उच्चतम न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी में शवों के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया जा रहा है। यह काफी डरावना है। इस सबके बीच लाइव हिन्दुस्तान दिल्ली की पांच ऐसी दर्दनाक कहानियां लेकर आया है जिसे पढ़कर आपकी आंखों में भी आंसू आ जाएंगे।

कहानी एक : बेटा खोया, अब परिवार पर संकट

पटपड़गंज के आईपी एक्सटेंशन की सोसायटी में रहने वाला एक परिवार इस समय सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। परिवार के इकलौते बेटे की कोरोना संदिग्ध के तौर पर इलाज के लिए भटकते हुए ही मौत हो गई। अब संकट यह है कि छह दिन बीत जाने के बाद भी अस्पताल की तरफ से मृतक की कोरोना रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। मृतक की मां की तबीयत भी लगातार बिगड़ती जा रही है।

आईपी एक्सटेंशन में रहने वाले इस परिवार में अब मृतक की पत्नी, दो पांच साल के जुड़वा बच्चे व विधवा मां बचे हैं। परिवार के इकलौते बेटे और मुखिया की अब मौत हो चुकी है। अब पूरे परिवार पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। मां को तेज बुखार है और गले में भी दिक्कत है। एक निजी डॉक्टर ने बुजुर्ग महिला में कोरोना के लक्षण बताए हैं, लेकिन सरकार ने इस परिवार की कोई सुध नहीं ली। अस्पताल से उन्हें रविवार को बताया गया था कि परिवार के अन्य सदस्यों का कोरोना टेस्ट बुधवार को कराया जाएगा, लेकिन अभी तक परिवार तो छोड़ो मृतक की रिपोर्ट नहीं आई है। रिश्तेदार मृतक की रिपोर्ट के लिए इधर से उधर भटकाया जा रहा है।

कहानी दो : 15 घंटे तक मौत की जानकारी नहीं दी

दक्षिणीपुरी से 67 साल के बुजुर्ग को 1 जून की रात कोरोना संदिग्ध होने के चलते लोकनायक अस्पताल में भर्ती किया गया। परिजन फोन के जरिए उनके संपर्क में थे। मगर गुरुवार को जब उनका फोन नहीं मिला तो शुक्रवार दोपहर परिजन उनसे मिलने पहुंचे। बुजुर्ग के पोते रजनीश को अस्पताल से पता चला कि उनकी मौत तो गुरुवार को ही हो गई थी। डॉक्टरों ने बताया कि शव मार्चरी में रखा हुआ है, जो शनिवार को उन्हें दिया जाएगा।

अस्पताल से नहीं किया फोन : बुजुर्ग के परिजनों ने आरोप लगाते हुए बताया कि उन्हें वसंतकुंज स्थित एक अस्पताल से निमोनिया की शिकायत के बाद सफदरजंग जाया गया था। जहां से आरएमएल और वहां से लोक नायक भेजा गया। उनकी कोरोना जांच नहीं की गई थी। बावजूद इसके उन्हें कोरोना संक्रमितों के साथ वार्ड में रखा गया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी मौत के 15 घंटे बाद भी अस्पताल प्रशासन ने उन्हें फोन कर इसकी जानकारी नहीं दी। वह तो लगातार बुजुर्ग का फोन मिला रहे थे। जब फोन नहीं मिला तो अस्पताल आ गए , तब दादा की मौत का पता चला।

कहानी दिन : न शव मिल रहा, न कब्रिस्तान में जगह

जीटीबी अस्पताल के शव गृह के बाहर खड़े लोनी स्थित अशोक विहार निवासी हमीद खां ने बताया कि गुरुवार को उनकी 22 साल की बेटी अफसान को बुखार था। वह उसे जीटीबी अस्पताल लाए, जहां उसकी रात 8 बजेमौत हो गई। वह रात 3 बजे तक शव लेने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें सुबह 9 बजे आने को कहा गया। सुबह उनसे बेटी का आधार कार्ड मांगा गया। मगर उनके पास शादीशुदा बेटी का कोई पहचान पत्र नहीं है। उन्होंने आगरा में रहने वाले दामाद से अफसाना का पहचान पत्र आने को कहा है। हमीद खां का कहना है कि बेटी का शव दफनाने के लिए उन्होंने शास्त्री पार्क व मुल्ला कॉलोनी के कब्रिस्तान में बात की तो वहां मना कर दिया गया।

कहानी चार : इलाज के लिए भटका बुजुर्ग, एंबुलेंस में मौत

कोरोना संदिग्ध को अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने से उसकी एंबुलेंस में ही मौत हो गई। मामला दक्षिणी दिल्ली के पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल का है। यहां एक 62 वर्षीय बुजुर्ग सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद कोरोना लक्षण दिखने पर कोरोना अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस उन्हें लेकर सफदरजंग और लोक नायक अस्पताल गई। बेड न होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया गया। एंबुलेंस कर्मी वापस पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल ले आया। वहां डॉक्टर बुजुर्ग को जीटीबी अस्पताल रेफर करने की कार्रवाई कर रहे थे। इस बीच एंबुलेंस में ही ऑक्सीजन पर रखा गया था। डॉक्टर पेपर तैयार कर ही रहे थे, तभी बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।

कहानी पांच : भगवान बने पड़ोसी

लक्ष्मी नगर में रहने वाले संजीव प्राइवेट कंपनी में काम करता है। कुछ दिन पहले कंपनी ने काम पर आने से मना कर दिया। इस बीच तबीयत खराब रहने लगी तो जांच करवाया। टेस्ट पाॅजिटिव आया। कई अस्पताल में भर्ती होने को गया लेकिन किसी ने भी भर्ती नहीं किया। बाद में पड़ोस में रहने वाले एक परिचित डॉक्टर ने किसी तरह एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाया।

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