कोरोना के 2154 नए मामले, सात और लोगों की मौत, 1766 मरीज स्वस्थ

तिरुअनंतपुरम: केरल में वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। केरल में रविवार को कोविड-19 के 2154 नए मामले आने के साथ ही राज्य में अभी तक कुल 73,854 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा ने एक बयान में बताया कि राज्य में रविवार को सात और लोगों की मौत होने के साथ ही संक्रमण से अभी तक 287 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि नए मामलों में से 49 लोग विदेश से लौटे हैं, 110 लोग दूसरे राज्यों से आए हैं और 1962 लोग राज्य में लोगों के संपर्क में आकर संक्रमित हुए हैं।

मंत्री ने बताया कि मरने वालों में पश्चिम बंगाल निवासी 49 वर्षीय एक कामगार, 90 वर्षीय एक महिला और कन्नूर जिले के तीन निवासी शामिल हैं। शैलजा ने बताया, ”33 स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित हुए हैं। रविवार को 1,766 लोगों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई। राज्य में अभी तक 49,849 लोग संक्रमण मुक्त हुए हैं। फिलहाल 23,658 मरीजों का उपचार चल रहा है।” मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बताया कि राज्य में अभी 1,99,468 मरीज निगरानी में हैं जिनमें 1,79,982 लोग घरों अथवा संस्थानों में क्वारंटाइन में हैं, जबकि 19,486 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अलावा राज्य में 14 और स्थानों को कोविड हॉटस्पाट घोषित किया गया है और 18 स्थानों को हॉटस्पाट की सूची से बाहर किया गया है। अभी कुल 586 स्थान हॉटस्पाट की श्रेणी में हैं।

भारत में कोविड-19 संक्रमण से उबरने वाले मरीज 27 लाख के पार
दूसरी ओर, भारत में कोविड-19 संक्रमण से उबरने वालों की संख्या 27 लाख के पार चली गई और स्वस्थ होने की दर 76.61 प्रतिशत हो गई है, जबकि इस महामारी से मृत्युदर और घटकर 1.79 फीसदी रह गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। इससे यह भी सामने आया कि उपचाराधीन मरीज की संख्या कुल संक्रमितों का महज 21.60 फीसदी है। मंत्रालय का कहना है कि लगातार अधिकाधिक मरीजों के इस संक्रमण से उबरने, अस्पतालों से छुट्टी मिलने एवं एवं पृथकवास से बाहर आने के साथ ही देश में अबतक 27,13,933 मरीज ठीक हो चुके हैं।

उसके अनुसार देश में आक्रामक तरीके से जांच करने, संक्रमितों के संपर्क में आने वालों का निगरानी के जरिए समय पर पता लगाने और चिकित्सा देखभाल बुनियादी ढांचों में विस्तार के जरिए प्रभावी तरीके से उपचार करने की की केंद्र की नीति के क्रियान्वयन से ऐसा संभव हो सका है।

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