कोरोना पेरोल से गायब कैदी, जेल प्रशासन ने बहराइच व श्रावस्ती के SP को भेजी रिपोर्ट

लखनऊ: यूपी की जेलों से परोल पर छोड़े गए कैदी लौट कर वापस नहीं आ रहे हैं। इन कैदियों को कोर्ट के आदेश पर परोल मिला, लेकिन वक्त बीतने के बाद भी कैदी वापस नहीं लौटे तो सरकार ने गिरफ्तारी अभियान चलाने का फैसला लिया है। दरअसल, कोरोना काल में जेलों में बंद सजायाफ्ता बंदियों को परोल पर छोड़े जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके चलते उत्तर प्रदेश की उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा जारी संस्तुतियों कुल 2256 सजायाफ्ता बन्दियों को प्रदेश की जेलों से 8 सप्ताह की विशेष परोल पर रिहा किए जाने की संस्तुति की गई थी।

रिहा किए गए कुल 2256 बन्दियों में से परोल के दौरान 4 की मौत हो गयी। इनमें से 136 की अंतिम रूप से रिहाई हो गयी और 56 अन्य वाद में जेल में निरुद्ध है। 193 को छोड़कर शेष 2063 बन्दियों को पुन: जेल में दाखिल होना था, जिसमें से परोल पर रिहा हुए कुल 693 बन्दी विभिन्न जेलों में वापस आ चुके हैं। अभी 1370 बन्दियों को दाखिल होना है, जिनके बारे में कुछ पता नहीं है।

जिला कारागार में कोरोना संक्रमण को देखते हुए तीन माह के पैरोल पर 18 कैदियों को छोड़ा गया था। इनमें सात कैदी को जेल की सलाखों में पहुंच गए हैं, लेकिन अभी तक 11 कैदी जेल नहीं पहुंचे हैं। निर्धारित समय सीमा पूरा होने के बाद भी वापसी न होने पर जेल प्रशासन ने संबंधित जिलों के एसपी को रिपोर्ट भेजी है। इन कैदियों की तलाश पुलिस कर रही है।

जिला कारागार में क्षमता से सवा दो गुना बंदी निरुद्ध हैं। कोरोना संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए शासन ने सात साल की सजा पा चुके या फिर दर्ज मुकदमों में सात वर्ष की अधिकतम सजा के प्रावधान वाले बंदियों को सशर्त रिहाई के आदेश दिए थे। इनमें सात साल की सजा पा चुके 18 बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया है। सात तो समय सीमा के अंदर जेल पहुंच गए है, लेकिन श्रावस्ती जिले के चार व बहराइच के सात कुल 11 कैदी अब तक जेल नहीं पहुंचे हैं। इनकी गिरफ्तारी कर जेल पहुंचाने के लिए जेल महकमे की ओर से बहराइच व श्रावस्ती के एसपी को रिपोर्ट भेजी गई है। संबंधित थानों को इनकी सूचना दी गई है। अभी तक ये लोग पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं।

कोरोना काल में सात वर्ष की सजा के प्रावधान वाले 287 बंदियों को भी अंतरिम जमानत मिली थी । कोर्ट के आदेश पर इन लोगों को जेल से रिहा किया गया था। डिप्टी जेलर शरेंदु त्रिपाठी ने बताया कि ये लोग सीधे कोर्ट पर ही हाजिर होंगे, लेकिन पैरोल पर रिहा कैदी सीधे जेल आएंगे।

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