कोरोना वायरस से मरे लोगों के अंतिम संस्कार में बाधा खड़ी कर रहे लोग, पढ़ें बॉडी मैनेजमेंट की गाइडलाइंस

जालंधर: पंजाब में अलग-अलग स्थानों पर कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ से मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। वीरवार को जालंधर में कोरोना वायरस का शिकार हुए प्रवीण शर्मा के अंतिम संस्कार को रोकने के लिए स्थानीय हरनामदासपुरा के निवासियों ने श्मशानघाट की तरफ जाते मार्ग को अवरुद्ध कर विरोध करना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे एसडीएम और अन्य उच्च अधिकारियों द्वारा लोगों को समझाने की सभी कोशिशें असफल रहीं। फिर पुलिस की सुरक्षा में कड़ी मशक्कत के बाद मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

लोगों का कहना है कि श्मशानघाट घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है और ऐसे में यहां संस्कार करने से इलाके में वायरस फैलने का खतरा है। उल्लेखनीय है कि इस तरह का राज्य में यह पहला मामला नहीं है। अमृतसर और लुधियाना में भी कोरोना वायरस से जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार में लोग बाधा खड़ी कर चुके हैं।

अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब के पूर्व रागी पद्मश्री निर्मल सिंह का अंतिम संस्कार करने में भी जिला प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। अमृतसर में ही कोरोना वायरस से संक्रमण के चलते जान गंवाने वाले 69 वर्षीय सेवानिवृत्त इंजीनियर की सोमवार को निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। परिवार ने उसका का शव लेने से ही इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने उसका अंतिम संस्कार किया। इससे पहले सोमवार को लुधियाना में भी एक मृतक के परिवार ने शव लेने से मना कर दिया था। 69 वर्षीय उस महिला का अंतिम संस्कार भी प्रशासन ने ही किया था।

बॉडी मैनेजमेंट की गाइडलाइंस

-कोविड-19 का प्रसार मुख्यतः ड्रॉपलेट (बूंदों से, जो कि खांसते-छींकते समय ज्यादा रहता है) से ही फैलता है। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मचारियों को ग्लव्स, मास्क, चश्मा, किट आदि पहनकर ही मृत शरीर को छूना होगा।
-शव को कीटाणुरहित लीक न होने वाले बैग या लिनन आदि में ही रखना है।
-कैथेटर, ट्यूब, ड्रेनेज, कैनुला आदि चिकित्सीय उपकरणों को एक फीसदी हाइपोक्लोराइट आदि से विसंक्रमित करना और सुरक्षित रखना या डिस्पोज करना है।
-मृत शरीर के तरल रिसाव वाले छिद्र (नाक, मुंह व कान आदि) को सबसे पहले बंद कर देना है।
-अस्पताल के चादर, गद्दा आदि को सुरक्षित रखकर साफ कराना या डिस्पोज करना होगा।
-फर्श, टेबिल, बेड के हत्थे आदि खुले स्थान को सोडियम हाइपोक्लोराइट से साफ करके 30-40 मिनट खुले में रखना होगा।
-शव को 4 डिग्री से. पर सुरक्षित तरीके से फ्रिज में रखना होगा।
-शव पर किसी प्रकार का लेप नहीं लगाना है।
-पीपीई किट पहनकर पोस्टमॉर्टम करना है। पोस्टमॉर्टम के समय प्रयोग उपकरणों व औजारों को सही से विसंक्रमित करना होगा।
-वहां कम से कम फोरेंसिक विशेषज्ञ व कर्मचारी आदि होने चाहिए। पोस्टमॉर्टम में मुख्य रूप से फेफड़े से नमूना लेते हुए कम एरोसेल जनरेशन सुनिश्चित करना होगा।
-शव को परिवारीजनों को सौंपने पर खुले हिस्से को सोडियम हाइपोक्लोराइट से संक्रमण मुक्त करना होगा।
-शवदाह के दौरान अधिक भीड़ नहीं होनी चाहिए।
-शवदाह करने वाले कर्मचारियों को कोई विशेष खतरा नहीं है।
-शवदाह के बाद राख लेने में भी कोई दिक्कत नहीं है।
-श्मशान गृह के सभी कर्मचारियों और यात्रा में शामिल लोगों को मुंह ढकना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है।

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