कोरोना वैक्सीन: जॉनसन एंड जॉनसन ने ट्रायल पर लगाई रोक, जानिए वजह

नई दिल्ली:  ट्रायल में शामिल एक शख्स के बीमार पड़ने के बाद अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन के इंसानी ट्रायल को रोक दिया है। मामले में एक स्वतंत्र मरीज सुरक्षा समिति बनाई गई है जो वालंटियर के बीमार पड़ने की वजह की समीक्षा करेगी। कंपनी ने कहा है कि बड़े ट्रायल्स के दौरान ऐसा होता रहता है और कंपनी की गाइडलाइंस के तहत ट्रायल को रोका गया है। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को भी रोक दिया गया है।

तीसरे चरण के ट्रायल को भी रोका गया

सोमवार को बयान जारी करते हुए जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा, “ट्रायल में शामिल एक शख्स में एक बीमारी देखे जाने के बाद हमने अपनी कोविड-19 वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल समेत क्लिनिकल ट्रायल में शामिल सभी लोगों को और खुराक देना अस्थाई तौर पर रोक दिया है।” इस रोक का मतलब है कि 60,000 लोगों के क्लिनिकल ट्रायल के लिए वालंटियर्स की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी रोक दी गई है।

कंपनी ने कहा- गंभीर प्रतिकूल घटनाएं क्लिनिकल ट्रायल का अपेक्षित हिस्सा

कंपनी ने कहा कि गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (SAE) किसी भी क्लिनिकल ट्रायल, खासकर बड़े क्लिनिकल ट्रायल, का अपेक्षित हिस्सा हैं और कंपनी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए ये पता लगने तक कि SAE वैक्सीन की वजह से हुई है या नहीं, ट्रायल को रोक दिया गया है। मामले में एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई गई है जो पूरे मामले की समीक्षा करेगी और ट्रायल शुरू करना सुरक्षित है या नहीं, ये बताएगी।

60,000 लोगों पर किया जाएगा वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल

बता दें कि जॉनसन एंड जॉनस की इस कोरोना वायरस वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। सितंबर के अंत में शुरू हुए अंतिम चरण के इस ट्रायल में अमेरिका के 200 शहरों और अन्य देशों के लगभग 60,000 लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जाएगी। अर्जेंटीना, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, मेक्सिको, पेरू और दक्षिण अफ्रीका अन्य वे देश हैं जहां इस वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। वैक्सीन अगले साल की शुरूआत तक बाजार में आ सकती है।

शुरूआती ट्रायल में इम्युनिटी प्रदान करने में कामयाब रही है वैक्सीन

जॉनसन एंड जॉनसन की ये वैक्सीन उन चंद वैक्सीनों में शामिल है जिन्हें ‘ऑपरेशन वॉर्प स्पीड’ के तहत अमेरिकी सरकार आर्थिक मदद प्रदान कर रही है। वैक्सीन के शुरूआती चरण के ट्रायल के नतीजे उम्मीद मुताबिक रहे थे और ये कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूत इम्युनिटी प्रदान करने में कामयाब रही। इससे पहले बंदरों पर हुए ट्रायल में भी ये उन्हें संक्रमण से बचाने में कामयाब रही। सबसे आगे चल रही वैक्सीनों में ये एक खुराक वाली एकमात्र वैक्सीन है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन के ट्रायल में भी आई थी रुकावट

बता दें कि इससे पहले ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी की कोरोना वायरस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल को भी एक वालंटियर के बीमार पड़ने के बाद रोकना पड़ा था। बाद में की गई समीक्षा में इस बीमारी का वैक्सीन से कोई संबंध नहीं पाया गया था जिसके बाद ब्रिटेन और भारत समेत अन्य कई देशों में इसके ट्रायल को दोबारा शुरू कर दिया गया था। हालांकि अमेरिका में इसका ट्रायल अभी भी रुका हुआ है।

 

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