कोरोना संकट में आय को लेकर डरे लोगों के बीच अभी भी आशा की किरण : सर्वे

नई दिल्ली: कोरोनावायरस महामारी से देशवासियों के बीच नौकरी खोने का डर और आय को लेकर चिंता बनी हुई है, मगर साथ ही लोग कई पहलुओं पर सकारात्मकता दिखाते हुए उम्मीद भी लगाए हुए हैं। यह बात एक राष्ट्रव्यापी आईएएनएस सी-वोटर सर्वेक्षण में सामने आई है। भारत में जब 25 मार्च 2020 को राष्ट्रव्यापी बंद लागू किया गया तो हर किसी को अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का अंदाजा था। लोगों को यह अनुमान था कि इस इससे काफी परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। तभी से आयोजित एक राष्ट्रव्यापी सी-वोटर ट्रैकिंग सर्वेक्षण में यह पता चला है कि भारतीयों में न केवल अपने स्वास्थ्य, बल्कि अपनी आर्थिक सुरक्षा को भी डर बना हुआ है। मगर फिर भी लोगों में एक आशा जरूर बनी हुई है कि यह संकट की घड़ी बीत जाएगी और लोग फिर से बेहतर भविष्य की उम्मीद भी कर रहे हैं।

सर्वे से पता चलता है कि अखिल भारतीय स्तर पर प्रत्येक तीन भारतीयों में से दो ने कहा कि वे अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रख रहे हैं। लिंग, आयु, शिक्षा और आय समूहों जैसे विभिन्न वर्गों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती हुई चिंता दिखाई दे रही है। ऐसे भारतीय जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, उनमें से आधे से भी कम ऐसे हैं, जो अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रख रहे हैं। वहीं दक्षिणी भारत में 58.7 प्रतिशत ने इस मुद्दे पर सकारात्मक उत्तर दिया है।

लेकिन यह उनका दैनिक आर्थिक जीवन है, जो बहुत बड़ी चिंताओं को जन्म देता है। उनके रोजगार की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर, देश भर में चार में से एक ने कहा कि वे पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। इनमें से कुछ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी तो कुछ के आय के साधन खत्म हो गए हैं। दस में से एक ने कहा कि वे बिना किसी वेतन के छुट्टी पर हैं। वास्तव में इस समय एक तिहाई से अधिक भारतीयों के पास कोई काम, नौकरी या आय का साधन नहीं है। लगभग छह प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि वे वेतन कटौती के साथ घर से काम कर रहे हैं, जबकि दस में से एक ने दावा किया कि वे बिना किसी वेतन कटौती के घर से काम कर रहे हैं।

शिक्षा के निम्न स्तर वाले लगभग छह प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे पूरे वेतन के साथ घर से काम कर रहे हैं। वहीं इस मामले में उच्च शिक्षित 25 प्रतिशत भारतीयों ने यह कहा कि वह पूरे वेतन के साथ घर से ही काम कर रहे हैं। निम्न शिक्षित भारतीयों की बात करें तो इनमें से 27 प्रतिशत लोगों का पूरी तरह से काम छूट गया है, जबकि उच्च शिक्षित 14 प्रतिशत से अधिक भारतीय बेरोजगार हैं। वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय स्तर पर 43.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अब तक उनकी आय में कोई नुकसान नहीं हुआ है, जबकि 23.8 प्रतिशत ने कम आय और 32.7 प्रतिशत ने आय की पूर्ण हानि के बारे में बताया है, क्योंकि कोरोना संकट से उनकी नौकरी छूट गई है।

कम शिक्षा वाले 38 प्रतिशत से अधिक भारतीयों ने सभी प्रकार की आय गंवा दी है, जबकि उच्च शिक्षित नागरिकों का आंकड़ा लगभग 17 प्रतिशत है। इसी तरह, कम आय वाले भारतीयों में से 36 प्रतिशत ने खोई हुई नौकरियों की सूचना दी, जबकि उच्च आय वाले नागरिकों के लिए यह आंकड़ा 21.5 प्रतिशत रहा। सी-वोटर सर्वेक्षण में हालांकि यह बात भी स्पष्ट हुई है कि लोगों में आशा बनी हुई है। जब जीवन व अन्य चीजों के संबंध में उनकी आशाओं के बारे में पूछा गया तो 57 प्रतिशत भारतीय बहुत आशान्वित दिखाई दिए। वहीं 26.8 प्रतिशत लोग कुछ हद तक आशावादी रहे और महज छह प्रतिशत लोग ही ऐसे रहे जो आशावादी नहीं थे।

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