कोरोना से आमदनी ठप, पर केंद्र मुआवजा क्यों दे: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने उस गुहार को ठुकरा दिया जिसमें अर्जी दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट बार क्लर्क असोसिएशन ने मदद की गुहार लगाई थी। याचिका में कहा गया था कि पिछले तीन महीनों से वो कोरोना के कारण वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय आपदा नियम के तहत केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह प्रत्येक मेंबर को 15 हजार रुपये मासिक तौर पर भुगतान करें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश देने से मना कर दिया।

केंद्र से कैसे भुगतान को कहें : SC
अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में पहला प्रतिवादी बनाया गया है। अदालत ने सवाल किया कि कैसे केंद्र सरकार को कहा जाए कि वह भुगतान करे। तब याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उन्हें इस बात की अनुमति देनी चाहिए कि वह रिप्रजेंटेशन के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सामने जाएं। तब कोर्ट ने कहा कि लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया तो वकीलों के मामले को देखती है।

तमाम क्‍लर्क झेल रहे वित्‍तीय संकट
याचिका में कहा गया था ऐसे तमाम क्लर्क को बेसिक सैलरी तक नहीं मिल पाई है। ऐसे में कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि केंद्र सरकार से कहा जाए कि वह प्रत्येक मेंबर को जब तक स्थिति नॉर्मल नहीं होती तब तक पेमेंट करें। याचिका में कहा गया है कि लॉकडाउन की घोषणा 24 मार्च को हुई थी लेकिन उसके बाद ये तमाम क्लर्क वित्तीय संकट में आ गए हैं और इस तरह उनके जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट से मदद की गुहार
याचिका में कहा गया था कि ज्यादातर बार क्लर्क की स्थिति ऐसी है कि उन्हें अपना जीवन यापन चलाने तक के लिए पैसे नहीं हैं।उनके बच्चों की स्कूल फीस, खाने और स्वास्थ्य की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उनके पास कोई और जरिया भी नहीं है। वकीलों के साथ क्लर्क का कामकाज है। वह वकीलों से जुड़े हुए हैं। वकीलों की कमाई नए केस की फाइलिंग से जुड़ी हुई है। लेकिन बीते कुछ महीनों से बहुत ही कम मामलों में केस फाइल की गई है। ऐसे में वकील अपने क्लर्क को भी पेमेंट नहीं कर पाए हैं। इस विषम परिस्थिति में क्लर्क ने मदद की गुहार लगाई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि भारत सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए करोड़ों के मदद की घोषणा की है। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा-11 के तहत इस तरह की परिस्थितियों से लड़ने के लिए प्रावधान करता है। ऐसे में याचिकार्ताओं की गुहार है कि उन्हें मुआवजा दिए जाने का केंद्र को निर्देश दिया जाए।

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