कोविड पाबंदियों के खिलाफ यूरोप के शहरों में तोड़फोड़ व हिंसा

एम्स्टर्डम: कोविड प्रतिबंधों के विरोध में नीदरलैंड सहित पूरे यूरोप में दंगे फैल गए। नीदरलैंड के रॉटरडम में शनिवार को भड़के दंगे रविवार को देश के अन्य शहरों में भी फैल गए। सरकार ने 10 फरवरी तक कोविड संक्रमण की रफ्तार को रोकने के लिए रात नौ बजे से सुबह 4:30 बजे के दौरान कर्फ्यू लगाने की घोषणा की थी। रविवार को हेग, एनस्किडे, एम्स्टर्डम आदि में हिंसक जुलूस निकाले गए। उर्क कस्बे में हिंसा के सिलसिले में अब तक 500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

उधर, कोरोना पाबंदी के खिलाफ यूरोप के अन्य देशों में भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए। नई पाबंदी से नाराज हजारों प्रदर्शनकारी ऑस्ट्रिया, क्रोएशिया और इटली की सड़कों पर जमा हो गए। पूरे यूरोप की कई सरकारों ने इस महामारी से निजात पाने के लिए नए सिरे से पाबंदियां लगाई हैं। ऑस्ट्रिया में सरकार द्वारा फिर से देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद राजधानी वियेना में 10 हजार से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किए। सरकार ने फरवरी में टीका लगवाना अनिवार्य कर दिया है।

ऑस्ट्रिया यूरोप का पहला देश है, जिसने टीकाकरण को कानूनी अनिवार्यता बना दिया है। वहीं, क्रोएशिया में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों के लिए टीकाकरण अनिवार्य करने के खिलाफ हजारों लोगों ने राजधानी जगरेब में मार्च निकाला। उधर, इटली की राजधानी रोम में करीब चार हजार लोगों ने कार्यस्थलों, सरकारी वाहनों और सार्वजनिक स्थानों पर ‘ग्रीन पास’ सर्टिफिकेट अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। वहीं, फ्रांस के अधिकारियों ने कैरीबियाई द्वीप गुआडेलोप में अशांति को नियंत्रित करने के लिए कई दर्जन और पुलिसकर्मी भेजे हैं। यहां फ्रांस का विदेश विभाग काम करता है। बेल्जियम के ब्रुसेल्स में भी आगजनी की खबरें हैं। जबकि ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्री साजिद जावीद ने कहा है कि ब्रिटेन और जर्मनी के बीच यात्रा नियमों में बदलाव की कोई योजना नहीं है।

कोविड कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों पर करीब आठ हजार रुपये (95 यूरो) के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पूरे देश में यह कर्फ्यू रात नौ बजे से सुबह 4:30 बजे तक लागू रहेगा। हालांकि एक सर्वे के मुताबिक देश के 70 फीसदी लोगों का मानना है कि सरकार का कर्फ्यू लगाने का फैसला सही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी यूरोपीय महाद्वीप में कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। क्षेत्रीय निदेशक डॉ. हैंस क्लग ने कहा, यदि पूरे यूरोप में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अगले चार महीनों में पांच लाख और लोगाें की मौत हो सकती है।

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