क्या आप जानते हैं हमारे “OK” बोलने के पीछे क्या इतिहास है ?

हम आमतौर पर कई तरह के शब्दों का यूज हमारी रोज की लाइफ में करते हैं “ओके” भी उन्हीं शब्दों में से एक है। ये शब्द इतना आम हो गया है हम इसकी उत्पत्ति के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस छोटे शब्द में काफी पेचीदा इतिहास छिपा है। “ओके” की जड़ों को समझाने के लिए कई तरह के सिद्धांत हैं, लेकिन सबसे सामान्य रूप से स्वीकार किए जाने वाले सिद्धांत के अनुसार यह दो शब्दों का संक्षिप्त नाम है जो कि वास्तव में “ओ” या “के” के साथ शुरू होता है।

अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि ओके का उपयोग “सब कुछ सही है” के लिए किया जाता है। यही वजह है कि हम इस शब्द का उपयोग किसी समझौते में हां, किसी बात पर सहमति, या किसी बात के अंत में कहने के लिए करते हैं। 1830 के दशक के अंत के दौरान इस तरह के शब्दों की शुरूआत हुई थी जब बातचीत के दौरान पूरे शब्दों के बजाय संक्षिप्त शब्दों का उपयोग किया जाना लोकप्रिय होने लगा था।

यह प्रवृत्ति बोस्टन में शुरू हुई और पूरे पश्चिम में फैल गई। यह जल्द ही गलत तरीके से गलत इस्तेमाल की जाने वाली वर्तनी के रूप में भी फैशन में आ गई। जैसे “पर्याप्त” के बजाय “इनफ” कहा जाने लगा। माना जाता है कि यह बोलना ठीक उसी तरह के विचित्रवाद के रूप में शुरू हो गया था जैसे कि “ओल करेक्ट” बोला जाता था जो कि 19वीं सदी के लोग विशेष रूप से सब कुछ सही होने पर काम में लेते थे। 1830 और 40 के दशक के बाद जो शब्द चर्चा में आए वो संक्षिप्त रूपों में से काफी समय तक चर्चा में नहीं रह पाए थे लेकिन दुनिया भर में इस ट्रैंड की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई और फैल गई।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... -------------------------
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper