क्या कहता है तालिबान का शरिया कानून, जानिए क्यों अफगान महिलाएं डर रही हैं इससे

नई दिल्ली: तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल है. तालिबानी नेता वहीदुल्लाह हाशिमी ने भी साफ कर दिया है कि अफगानिस्तान में अब लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं होगी, बल्कि तालिबान शरिया कानून लागू करेगा. पर यह शरिया कानून क्या है जिस वजह से वहां की महिलाएं इतना डरी हुई हैं.

क्या है शरिया कानून

शरिया का मतलब होता है पानी का एक साफ और व्यवस्थित रास्ता. यह इस्लामिक कानून व्यवस्था है. शरिया कानून को कुरान और इस्लामी विद्वानों के फैसलों यानी फतवों से मिलाकर तैयार किया गया है. शरिया कानून में यह बताया गया है कि आखिर एक मुसलमान को कैसे, कब और किस परिस्थिति में क्या करना चाहिए.

अपराध करने पर शरिया कानून में क्या मिलता है दंड

शरिया कानून के तहत अपराधों को दो कैटेगरी में बांटा गया है- तजीर और हद. तजीर कैटेगरी में आने वाले अपराधों के लिए सजा न्यायाधीश के विवेक से दी जाती है. जबकि हद अपराधों में कठोर सजा मिलती है. हद अपराध में चोरी करना भी शामिल है. चोरी करने पर हाथ काट दिए जाते हैं. कुरान को नकारने या आलोचना करने पर मौत की सजा दी जाती है.

शरिया कानून प्रणाली बाकी कानून प्रणालियों से बहुत ज्यादा मुश्किल है. इस्लामी कानूनों के जज जो मार्गदर्शन और निर्णय लेते हैं, उसे फतवा कहा जाता है. बता दें कि इंडोनेशिया, इजिप्‍ट, ईरान, इराक, मलेशिया, मालदीव, नाइजीरिया, केन्या और इथियोपिया जैसे देश शरिया कानून का पालन करते हैं. हालांकि ज्यादातर देशों में पत्थर मारकर मौत की सजा पर प्रतिबंध लगा लग चुका है.

जब 1996 से 2001 के बीच तालिबान ने अफगानिस्तान पर राज किया था तो शरिया कानून के नाम पर वहां के लोगों को बहुत यातनाएं दी गई थी. हत्या और रेप के दोषियों को सरेआम फांसी दी जाती थी. चोरी करने पर हाथ काट दिए जाते थे. बच्चियों के स्कूल जाने पर रोक थी. औरतों को खुलकर जिंदगी जीने का अधिकार नहीं. घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं. महिलाएं परिवार के किसी पुरुष के साथ ही घर से बाहर निकल सकती हैं. उन्हें अपने पूरे बदन को ढ़ककर रखना पड़ता है.

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