क्या कांग्रेस अब ब्राह्मण और मुस्लिम से दूरी बना रही है ?

दिल्ली ब्यूरो: क्या कांग्रेस की प्राणी राजनीति बदल रही है ? क्या कांग्रेस अब दलित ब्राह्मण और मुस्लिम की राजनीति से परे होकर नयी राजनीति करेगी? राहुल गांधी जब से पार्टी अध्यक्ष बने है और जिस तरह की उनकी टीम बनती दिख रही है उससे तो यही लग रहा है कि अब कांग्रेस वोट की राजनीति को नए नजरिये से देख रही है। राहुल की वर्तमान राजनीति से ब्राह्मण नेता हाशिये पर जाते दिख रहे हैं तो मुस्लिम नेता से भी राहुल की दूरियां बढ़ती दिख रही है। कहने के लिए ब्राह्मण चेहरे तो अभी भी पार्टी में कही कही दिख रहे हैं लेकिन मुस्लिम चेहरे गायब होते जा रहे हैं।

कांग्रेस की अब तक की राजनीति ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम तक ही सीमित थी लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। इस समय कांग्रेस दलित राजनीति तो कर रही है पर ब्राह्मण और मुस्लिम दोनों से दूरी बना रही है। कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा से रिटायर हुए के रहमान खान को फिर मौका नहीं दिया। वे यूपीए के राज में राज्यसभा के उप सभापति थे। पर उनको इस बार कर्नाटक से फिर राज्यसभा में नहीं भेजा गया। जबकि कांग्रेस को इस बार राज्यसभा में कर्नाटक से दो सीटें ज्यादा मिलीं।

अकेले रहमान खान रिटायर हुए और तीन सदस्य नए चुने गए। इसी तरह कांग्रेस की दिग्गज नेता मोहसिना किदवई का कार्यकाल खत्म हुआ था तो उन्हें फिर से राज्यसभा में लाने का प्रयास नहीं किया गया। इस बार भी बिहार से पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर शकील अहमद के नाम की चर्चा चल रही थी। पर ऐन मौके पर उनकी जगह डॉक्टर अखिलेश प्रसाद सिंह को राज्यसभा में भेजा गया। सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष रहते अहमद पटेल उनके राजनीतिक सचिव थे और एक तरह से सारी शक्तियां उनके हाथ में थीं। पर राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद अहमद पटेल अपने पद से हट गए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले चार महीने में जो नियुक्तियां की हैं उनमें भी कोई मुस्लिम नहीं है। उन्होंने कई राज्यों में प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किए हैं और कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस संगठन में भी कुछ पदों पर बदलाव हुआ है, लेकिन वहां भी मुस्लिम नेताओं को जगह नहीं मिली है। कांग्रेस में इस समय मुस्लिम चेहरे के तौर पर सिर्फ गुलाम नबी आजाद दिख रहे हैं। के रहमान खान, सैफुद्दीन सोज, शकील अहमद, सलमान खुर्शीद आदि तमाम नेता किनारे हो गए हैं। प्रदेशों में भी पहले कांग्रेस के पास कई बड़े नामी नेता होते थे, लेकिन अब वहां भी मुस्लिम चेहरे नहीं दिख रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि हिंदू दिखने के चक्कर में कांग्रेस ने मुस्लिम नेताओं को किनारे किया है या मुस्लिम राजनीति का जिम्मा अपनी क्षेत्रीय सहयोगी पार्टियों के ऊपर छोड़ा है।

कांग्रेस के लोग हालांकि ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि वक्त और जरुरी के हिसाब से नेताओं का चयन जरुरी है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते है कि कांग्रेस किसी एक समाज की राजनीति नहीं करती और जहां तक मुश्लिम और ब्राह्मण सवाल है, पूरे देश में आज भी ब्राह्मण और मुस्लिम नेता अपना काम कर रहे हैं। अभी युवाओं को राजनीति में लाने की बात चलरही है इसीलिए यह सब दिख रहा है। पार्टी के भीतर सबका सामान आदर है और सामान काम बांटे गए है। आगे आगे देखिये किसी भी समाज को कोई परेशानी नहीं होगी।

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