क्या यूपी में कांग्रेस चार कार्यकारी अध्यक्ष बहाल करेगी ?

राजबब्बर के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा के बाद यह खबर सामने आयी थी कि कांग्रेस जल्द ही यूपी में नए अध्यक्ष की बहाली करेगी। कई नाम भी सामने भी आये थे। जितिन प्रसाद ,राजेश मिश्रा ,ललितेश पति त्रिपाठी और प्रमोद तिवारी के बारे में चर्चा होने लगी थी। कहा जाने लगा था कि सूबे में कांग्रेस किसी ब्राह्मण छबि पर ही दाव लगाएगी। जिनके जिनके नाम सामने आये थे उनके आगे पीछे लोग भी मडराने लगे थे। कांग्रेस ने यह भी ऐलान किया था कि जल्द ही नए अध्यक्ष की घोषणा की जायेगी। लेकिन अभी तक इसका ऐलान नहीं हुआ है। कांग्रेस से मिली जानकारी के मुताविक पार्टी अध्यक्ष इस मामले को लेकर प्रदेश के कई नेताओं से चर्चा भी कर रहे हैं। खबर है कि संभावित उम्मीदवारों से भी राहुल गाँधी ने बातचीत की है लेकिन अंतिम फैसला अभी तक नहीं लिया है।

प्रदेश अध्यक्ष की बहाली में हो रही देरी को लेकर पार्टी के एक नेता का कहना है कि चुकी यूपी बड़ा राज्य है इसीलिए अब यहां प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति कई समीकरण को साधते हुए की जानी है। राहुल गाँधी चाहते हैं कि प्रदेश में एक अध्यक्ष बने और चार इलाको के लिए चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाए ताकि सभी इलाकों की राजनीति और जातीय समीकरण को साधा जा सके। इसके अलावा चुकी आगामी चुनाव सपा -बसपा -कांग्रेस गठबंधन के तहत लड़ना चाहती है। ऐसे में गठबंधन की घोषणा होने के बाद ही नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जायेगी।

कांग्रेस चाहती है कि प्रदेश की बागडोर किसी ऐसे नेता के हाथ में दी जाय जो गठबंधन धर्म का भी पालन कर सके और सपा -बसपा से भी बेहतर सम्बन्ध बना कर चल सके। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताविक कांग्रेस इस बात से सहमत हो गयी है कि प्रदेश के चार इलाकों के चार कार्यकारी अध्यक्ष रखे जायेंगे। गुजरात में कांग्रेस पहले ही ऐसा कर चुकी है। उसका लाभ भी पार्टी को मिला था। ब्राह्मण अध्यक्ष बनाने और चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के अलावा तीसरा फार्मूला यह भी है कि प्रदेश को चार हिस्सों में बांट कर चार लोगों को इसकी जिम्मेदारी दी जाए।

वैसे भी उत्तर प्रदेश का अघोषित विभाजन चार हिस्सों में है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा बुंदेलखंड और अवध के इलाके में मोटे तौर पर विभाजन है। पांचवां इलाका रूहेलखंड का है। ऐसे में कांग्रेस के कुछ नेता सभी इलाकों के लिए अध्यक्ष बनाने की सलाह दे रहे हैं। यह संभव है कि एक अध्यक्ष बना कर कुछ कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाएं और उनको इन इलाकों का जिम्मा दिया जाए। इससे कांग्रेस को जातीय समीकरण साधने में भी आसानी होगी।

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