क्या सुरक्षा में चूक है पुलवामा की घटना ?

दिल्ली ब्यूरो: पुलवामा की आतंकी घटना अब तक की सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। इस आतंकी हमले में मारे गए जवानों की संख्या 46 तक पहुंच गई है।इसकी जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। देश-दुनिया में इस हमले की निंदा हो रही है। एनआईए ने इसकी जांच भी शुरू कर दी है। लेकिन क्या इस हमले में सुरक्षा के मोर्चे पर हुई चूक का भी योगदान रहा? खबरों के मुताबिक खुफियां एजेंसियों को इस तरह के हमले का अंदेशा था। मीडिया में एक चिट्ठी लीक हुई है जिसके हवाले से कहा जा रहा है कि आठ फरवरी को इस सिलसिले में एक अलर्ट भी जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी आईईडी के जरिये सुरक्षा बलों के काफिले हमला कर सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के आवागमन के लिए एक तय प्रक्रिया बनी हुई है। उनका काफिला गुजरने से पहले संबंधित इलाके की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार रोड ओपनिंग पार्टी यानी आरओपी इसके लिए हरी झंडी देती है। आरओपी में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल होते हैं। जो चिट्ठी मीडिया में लीक हुई है उसमें जोर देकर कहा गया है कि तैनाती वाले स्थान पर जाने से पहले इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए 12 फरवरी को भी एक अलर्ट जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि जैश-ए-मोहम्मद सैन्य बलों पर बड़ा हमला कर सकता है। पुलवामा में हुए हमले की ज़िम्मेदारी इसी संगठन ने ली है। इसने कुछ समय पहले एक वीडियो भी जारी किया था। इसमें अफगानिस्तान में इसी तरह का हमला दिखाया गया था जैसा पुलवामा में हुआ जैश ने चेतावनी दी थी कि वह कश्मीर में इसी तरह से हमला करेगा. कहा जा रहा है कि इसी वीडियो के आधार पर राज्य के खुफिया विभाग ने सबको आगाह किया था। इन सब बातों के लिहाज से पुलवामा में हुआ हमला सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना जा रहा है।

कुछ जानकार मानते हैं कि यह फौरी चूक है जिसे तुरंत ही ठीक भी किया जा सकता है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। लेकिन उनके मुताबिक इससे बड़ी चूक है उस व्यवस्था की है जो कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए फौरी उपायों से आगे नहीं देखती। स्थानीय पत्रकार मान रहे हैं कि अगर सीमा पर लड़ने और उपद्रवियों से संघर्ष करने की ज़िम्मेदारी सैनिकों की है तो राजनीतिक शक्ति की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वह ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करे जहां इस तरह की हिंसक परिस्थिति पैदा होने से टाली जा सके। ’

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