क्यों भारत और नेपाल के बीच बढ़ रही है तनातनी, क्यों नेपाल जारी करेगा नया नक्शा, जानिए क्या है लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा विवाद

नई दिल्ली: कोरोनावायरस से दौर से गुज़र रहे भारत और नेपाल के बीच बीते कई महीनों से ठनी हुई है. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद लगातार गहराता जा रहा है. अब बढ़ती राजनीति के बाद नेपाल सरकार ने तय किया है कि वो एक नया राजनीतिक नक्शा जारी करेगी, जिसमें विवादित क्षेत्रों को नेपाल की सीमा में दिखाया जाएगा.

ये विवादित क्षेत्र हैं- लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा. भारत ने हाल ही में लिपुलेख में कुछ निर्माण कार्य शुरू किया, जिस पर नेपाल ने आपत्ति जताई और इसके बाद फिर से सीमा विवाद गहरा गया. सोमवार को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्‍व में कैबिनेट की बैठक के दौरान इस मैप को मंजूरी दी गई है.

भारतीय नक्शे ने इन क्षेत्रों को लंबे समय से अपनी टेरिटरी में दिखाया है. हालांकि नेपाल भारत के इस नक्शे को ख़ारिज करते हुए लगातार ये दावा कर रहा है कि भारत सुगौली की 1816 की संधि का उल्लंघन कर रहा है.

मैप जारी होने के बाद नेपाल की राष्‍ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने कहा, “लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी इलाके नेपाल में आते हैं और इन इलाकों को वापस पाने के लिए मज़बूत कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे. नेपाल के सभी इलाक़ों को दिखाते हुए एक आधिकारिक मैप जारी होगा.”

नेपाल सरकार के प्रवक्ता युवराज खातीवाड़ा ने कहा कि नए राजनीतिक मानचित्र का उपयोग हर सरकारी निकाय और सभी पाठ्य पुस्तकों में किया जाएगा. वहीं पिछले दिनों धारचूला से लिपुलेख तक नई रोड का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से उद्घाटन किया गया था. इस रोड पर काठमांडू ने आपत्ति जताई है. लिपुलेख वो इलाक़ा है जो चीन, नेपाल और भारत की सीमाओं से लगता है. नेपाल भारत के इस क़दम को लेकर नाराज़ है. लिपुलेख में कथित ‘अतिक्रमण’ के मुद्दे को लेकर नेपाल में भारत विरोधी प्रदर्शनों का सिलसिला भी जारी है.

गरमा रहा है लिपुलेख का मामला
भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवाना ने शुक्रवार को कहा था कि उत्तराखंड में चीन की सीमा पर लिपुलेख पास तक बनी नई भारतीय रोड के ख़िलाफ़ नेपाल का विरोध किसी और के इशारे पर हुआ था. उनके बयान का व्यापक रूप से यह अर्थ निकाला गया है कि नेपाल चीन के लिए एक प्रॉक्सी के रूप में काम कर रहा है, ऐसे समय में जब लद्दाख में चीनी पीएलए और भारतीय सेना के बीच LAC पर तनाव बढ़ गया है.

लिपुलेख में रोड बना रहा है भारत
लिपुलेख में रोड बना रहा है भारत
धारचूला से लिपुलेख तक बनाई गई इस रोड से कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों की दूरी कम हो जाएगी. सड़क लद्दाख में तनाव के वर्तमान दृश्य से बहुत दूर है. यह कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग पर है, जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले से होकर जाती है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह रोड ‘सीमा सड़क संगठन’ द्वारा बनाई गई है. इसका निर्माण रणनीतिक, धार्मिक और व्यापार कारणों को देखते हुए किया गया है.

कालापानी पर क्या है तकरार?
2 नवंबर 2019 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद, भारत ने देश का नया नक्शा जारी किया था. इसी नक्शे पर नेपाल ने अपने तेवर तल्ख़ कर लिए. नेपाल को इस मानचित्र के उस हिस्से से आपत्ति है, जहां विवादित कालापानी क्षेत्र को भारतीय सीमा में रखा गया है. नेपाल का दावा है कि ये हमेशा से उसका हिस्सा रहा है. नेपाल के मुताबिक़ 1961 में भारत-चीन युद्ध से पहले नेपाल ने कालापानी में जनगणना करवाई थी और तब भारत ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी. नेपाल का कहना है कि कालापानी में भारत की मौजूदगी सुगौली संधि का उल्लंघन है. वहीं, भारत नेपाल के दावे को लगातार ख़ारिज़ कर रहा है.

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