क्षीरसागर से विष्णु देखेंगे मंत्रिमंडल का विस्तार…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेषसय्या पर शयन मुद्रा में हैं। पास में बैठी लक्ष्मी जी का ध्यान धरती पर देवभूमि के राष्ट्र भारत के ह्रदय प्रदेश की राजधानी की तरफ़ जाता है जहाँ प्रभारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल नवनियुक्त मंत्रियों को शपथ दिला रही हैं।ध्यान धरती की तरफ़ होने पर भगवान विष्णु के पैर पर थोड़ा ज़्यादा भार पड़ने लगता है। वह पूछते हैं कि देवी ध्यान कहाँ है तो वह आँखों देखा हाल बताती हैं। प्रभू मृत्युलोक में एक परिसर में तमाम मंत्री शपथ ले रहे हैं। यह दृश्य देखकर मुझे जिज्ञासा हुई कि कहीं यह वही शपथ ग्रहण समारोह तो नहीं है जिसका आपको पिछले सौ दिन से इंतज़ार था। भगवान विष्णु ने कुछ व्यंगात्मक लहजे़ में लक्ष्मी जी को कहा कि देवी आप बिलकुल सही कह रही हैं।

यह वही शपथ ग्रहण समारोह है जिसके होने में मृत्युलोक के शिव और विष्णु को पसीना पसीना होने के बाद यह दिन देखने को मिला है। दोनों ने बहुत कोशिश की कि वह मेरे शयन में जाने से पहले यह कार्य संपन्न कर लें लेकिन दिल्ली विराजे दल के देवों ने उनकी एक न सुनी और महाराज ने भी हिसाब लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर दोस्तों ने भी जैसी करनी वैसी भरनी का रवैया अपनाते हुए मृत्युलोक के शिव और विष्णु को यह अहसास करवा दिया कि सत्ता फूलों की सेज नहीं बल्कि काँटों का ताज है।इस बार वैसा कुछ भी होने वाला नहीं है जैसा तुमने सोच रखा है। इस बार तो रहीम का वह दोहा ताबीज़ बनाकर गले में लटका लो।लक्ष्मी जी ने जिज्ञासा और कौतूहल से पूछा कौन सा दोहा प्रभु। विष्णु जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि वही जो तुम्हें बहुत पसंद है।

कहो रहीम कैसे निभें केर बेर को संग
वे डोलत रस आपने और उनके फाटत अंग
लक्ष्मी जी मुस्कराईं और प्रभु का इशारा समझ गई।प्रभु बोले कि वह मध्यप्रदेश के सत्ताधारी दल के शिव-विष्णु से कभी मजाक में ज़रूर कहेंगे कि कितनी देर कर दी विस्तार में, क्या हमारे शयन का इंतज़ार था।

मृत्युलोक में भी चर्चा देवताओं के शयन की हो रही थी और सफ़ेद वस्त्र पहने कुछ धर्म कर्म मानने वाले नेता यह शोक जता रहे थे कि एक दिन पहले ही यह शपथ ग्रहण हो जाता तो कितना शुभ मुहूर्त में यह काम संपन्न हो जाता। फिर कथा चातुर्मास्य की चल पड़ी कि पुराणों के अनुसार चार माह (श्रावण, भादौ, अश्विन एवं कार्तिक) के लिए विष्णु भगवान क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं। तीनों लोकों के स्वामी होने की वजह से भगवान का शयनकाल संपूर्ण संसार का शयनकाल माना जाता है।देवशयनी या हरिशयनी एकादशी या देशज भाषा में देवसोनी ग्यारस आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनाई जाती है। चूँकि एकादशी व्रत भगवान विष्णु की आराधना का व्रत है, इसलिए देवसोनी व देवउठनी एकादशियों का विशेष महत्व है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का चार माह का समय हरिशयन का काल समझा जाता है।वर्षा के इन चार माहों का संयुक्त नाम चातुर्मास्य दिया गया है।इन चार माहों के दौरान शादी-विवाह, उपनयन संस्कार व अन्य मंगल कार्य वर्जित बताए गए हैं।फिर बात मंत्रिमंडल विस्तार पर आ जाती है कि वैसे शिव का विष्णु के साथ दिल्ली लोक गमन का उद्देश्य यही था कि आख़िर पाँच के साथ कब तक सरकारी घोड़े पर सवारी…कम से कम देव सोने से पहले तो विस्तार को आकार देकर नए मंत्रियों को मन के देवों का आशीर्वाद दिला दें जिनसे शुभ लाभ की गंगा प्रदेश में बहने का मनोभाव साकार होने की दिलासा दिल में बनी रहे। पर मनोकामना पूरी न हो सकी। जो हरि इच्छा वही सही।

लक्ष्मी जी फिर बोल पड़ी कि प्रभु मृत्युलोक में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें मंगलकारी शासन और अमंगलकारी शासन का प्रसंग सामने आ रहा है।भगवान विष्णु ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देवी यह वीडियो उस कांग्रेस दल की पीड़ा बता रहा है जिससे हाल ही में सत्ता छीनी गई है। और जब से सत्ता बदली है तब से मध्य प्रदेश में कोरोना ने त्राहि त्राहि मचा रखा है।मंत्रिमंडल विस्तार में सैकड़ों अड़चनें आयी है। अपनों को ही मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पा रही है।लॉकडाउन अस्त्र ने अर्थव्यवस्था पर सीधी मार कर दी है। हत्याओं आत्महत्याओं का दौर चल पड़ा है।और कांग्रेस ही तो सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उनके लिए तो घर का भेदी लंका ढाए की कहावत चरितार्थ हो गई है। यही वजह है कि उन्हें इस सरकार में सब अमंगल ही अमंगल दिख रहा है। अब उनकी धार्मिक आस्था यह उम्मीद जता रही है कि उपचुनावों के बाद उनकी मंगलकारी सरकार फिर लौटेगी क्योंकि जनता सब जानती है। और जनता ही उनके साथ न्याय करेगी। पर जनता क्या क्या जानती है यह जान पाना किसी के बस की बात नहीं है।

देवी आप तो जानती है कि सीता के चरित्र पर जनता ने क्या उँगली उठायी थी। कि उनका पूरा जीवन ही जंगल में गुज़र गया। इसलिए अब आगे इस प्रसंग पर बाद में बात करेंगे। देवी अभी तो हमें भी मृत्युलोक की एक झलक दिखलाओ।शयन के समय ही क्षीरसागर से ही मंत्रिमंडल विस्तार और नए नए मंत्रियों के चेहरे देखे जाएँ।मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का इंतज़ार करते-करते हमारी भी तो आंख़ें थक गई थीं और हमें शयन की तरफ़ जाना पड़ा। इसी तरह मंत्री बनने की इच्छा रखते रखते कई वरिष्ठ विधायक निराशा के दौर में चले गए हैं। और आज के बाद वे दिन में भी सोते हुए नज़र आएंगे और उनकी रात आँखों में ही गुज़र जाएगी।और जो मंत्री बन भी जाएंगे उनकी भी खैर नहीं है।आख़िर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना और अंतर्कलह से ख़ुद को उबार पाना जैसी दो नावों की सवारी उन्हें पूरे समय करनी पड़ेगी।फिर सबसे बड़ी चुनौती तो तीन महीने बाद ही है जब जनता सवाल करेगी और मंत्रियों को जवाब देना पड़ेगा। बिकाऊ टिकाऊ ख़रीद फ़रोख़्त मंगलकारी अमंगलकारी विकास विनाश ईमानदार भ्रष्ट जैसे तमाम जुमले जनता के बीच में उछलेंगे और जनता मज़ा लेगी भी और मज़ा चखाएगी भी।

अंत में लक्ष्मी जी ने विष्णु जी से पूछा कि प्रभु मंत्रिमंडल विस्तार में समुद्र मंथन, अमृत और विष पान जैसे शब्द कानों में क्यों गूँज रहे हैं तो विष्णु जी मुस्कुराए और बोले कि देवी मृत्युलोक के वासी जब खुद की तुलना देवों से करने लगते हैं तो इस तरह के शब्दों के साथ हँसी ठिठोली कर अपना दिल हल्का करते रहते हैं। इतना कहकर भगवान विष्णु क्षीरसागर की तरफ़ निहारने लगे , देवी लक्ष्मी बहुत देर तक मृत्युलोक की तरफ़ देखती रहीं और शेषनाग जी भी कभी भगवान विष्णु तो कभी देवी लक्ष्मी की तरफ़ देखकर मुस्कुराते रहे।

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