क्षेत्रीय दलों के सामने सरेंडर करती कांग्रेस

दिल्ली ब्यूरो: कांग्रेस अब क्षेत्रीय दलों के सामने सरेंडर करती जा रही है। इसके बिना अब काम भी नहीं चलने वाला। हालांकि कांग्रेस के लगातार गिरते ग्राफ से कई क्षेत्रीय दल खुश हैं। कई क्षेत्रीय दल अभी कांग्रेस से दुरी बनाकर चल रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर एक तरफ आपसी गठजोड़ की बातें चल रही है लेकिन कांग्रेस पर अभी भी कई दल भरोसा नहीं कर रहे। इधर कुछ राज्यों में कांग्रेस के साथ कई दल तालमेल करते नजर आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र कांग्रेस ने क्षेत्रीय पार्टियों के साथ तालमेल कर लिया है। कहा जा रहा है कि जल्दी ही इन चारों राज्यों में सीटों के बंटवारे पर बातचीत हो सकती है। बाकी राज्यों में कांग्रेस इस साल के अंत में होने वाले तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद तालमेल की बात करेगी। कांग्रेस के कई दूत इस काम में लगे पीले है। कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद अब कांग्रेस भी समझने लगी है कि बिना क्षेत्रीय दलों को मिलाये राजनीति मुश्किल है।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के आगे एक तरह से सरेंडर कर दिया है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में अपने उम्मीदवारों का हस्र देखने के बाद कांग्रेस ने कैराना में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं दिखाई। हालांकि किसी पार्टी ने कांग्रेस के साथ इस बारे में चर्चा नहीं की पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं दिया। बताया जा रहा है कि अगले चुनाव में तालमेल को ध्यान में रख कर ही कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं दिया है। यूपी में सपा -बसपा गठजोड़ के बाद कांग्रेस इन्ही दलों के हवाले हो गयी है। गठबंधन में इसे जो भी सीट मिल जाए उसी पर संतोष करना होगा।

इसी तरह कांग्रेस ने महाराष्ट्र की भंडारा गोंदिया लोकसभा सीट के उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा, जबकि इस सीट से जीते हुए सांसद नाना पटोले भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। फिर भी कांग्रेस ने यह सीट एनसीपी के लिए छोड़ दी क्योंकि यह पारंपरिक रूप से प्रफुल्ल पटेल की सीट है। इसी तरह कांग्रेस ने झारखंड की दो विधानसभा सीटों सिल्ली और गोमिया में भी उम्मीदवार नहीं दिया। उसने इन दोनों सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार का समर्थन किया है। इससे पहले जेएमएम ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन दिया था। इन दोनों राज्यों में जल्दी ही सीटों का बंटवारा फाइनल हो सकता है। बिहार में कांग्रेस का तालमेल राजद के साथ है। दोनों पार्टियों के बीच सीटों के मामले में भी मोटे तौर पर सहमति बनी हुई है।

अब कांग्रेस के लोग मध्यप्रदेश ,छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सहयोगी दल तलाश रहे हैं। अशोक गहलोत को यह जिम्मेदारी दी गयी है। माना जा रहा है कि इन राज्यों के कई दलों के साथ कांग्रेस तालमेल बैठायेगी। राजस्थान में सहयोगी तलाश रही है कांग्रेस लेकिन अभी कोई मिलता नहीं दिख रहा। कांग्रेस की बड़ी समस्या दक्षिण के राज्य बने हुए हैं। देखना होगा कि दक्षिण में कौन सी पार्टी कांग्रेस को गले लगाने आगे आती है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper