खुलासा: मस्जिद की आड़ में चल रहा था बालकोट में आतंकी कैम्प

दिल्ली ब्यूरो: खुफिया रिपोर्ट के आधार पर यह खबर आ रही है कि पाकिस्तान के बालाकोट में जिस जगह भारतीय वायु सेना ने ‘गैर-सैन्य’ हमला किया था, वहां आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद एक मस्जिद की आड़ में अपना कैंप चला रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक यह कैंप छह एकड़ में फैला हुआ था जहां पांच से छह इमारतें मौजूद थीं। इनमें 600 से ज्यादा लोगों को रखा जा सकता था।

अधिकारियों ने खुफिया रिपोर्टों के हवाले से एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि जैश-ए-मोहम्मद इस मस्जिद का इस्तेमाल अपना प्रोपोगंडा चलाने के लिए करता था। यहां युवाओं को 2002 के गोधरा दंगे और आईसी 814 विमान की हाईजैकिंग से जुड़े वीडियो दिखाए जाते थे। अधिकारियों के मुताबिक प्रशिक्षण के बाद आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना कर दिया जाता था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया नेशनल हेराल्ड हाउस को खाली करने का आदेश

यह काम मुख्यतः चार रास्तों के जरिए किया जाता था। एक अधिकारी के मुताबिक बालाकोट-केल-दुधनियाल, केल-कैंथावली, केल-लोलब जिला और केल-कचामा क्रालपोरा रूटों से आतंकी जम्मू-कश्मीर में दाखिल होते थे। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ये सभी रास्ते राज्य के कुपवाड़ा जिले तक जाते हैं।

खबर के मुताबिक़, खुफिया रिपोर्टों में आतंकी कैंप से जुड़ी और भी जानकारियां है। मसलन, यहां आतंकियों को अलग-अलग प्रकार के कोर्स कराए जाते थे। दौरा-ए-खास नाम के तीन महीने के कोर्स में युद्ध करने का उच्च प्रशिक्षण दिया जाता था। वहीं, दौरा-ए-राद में नए लड़ाके तैयार किए जाते थे।

पाक सेना के कब्जे में भारत का शेर पायलट अभिनंदन ने कहा- नहीं बताऊंगा अपना मिशन

रिपोर्ट कहती है, ‘आतंकियों को एके 47, मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर आदि हथियार चलाना सिखाया जाता था। इसके अलावा जंगलों रहते हुए कैसे जिंदा रहें, घात लगा कर कैसे हमला करें और जीपीएस व नक्शे का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता था। ’ अधिकारियों के मुताबिक जैश से पहले हिज्बुल मुजाहिदीन इस कैंप का इस्तेमाल करता था।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Loading...
E-Paper