गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो रहे ललिता गौरी और कात्यायनी के दरबार

वाराणसी। वासंतिक चैत्र नवरात्र में छठे दिन शुक्रवार को धर्म नगरी काशी मां दुर्गा के छठे गौरी स्वरूप ​ललिता गौरी और नवदुर्गा स्वरूप कात्यायनी के पूजन अर्चन में लीन रही। दोनों मंदिर परिक्षेत्र देवी के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा। आधी रात के बाद से ही ललिताघाट स्थित ललिता गौरी के दर्शन-पूजन के लिए दरबार में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा।

श्रद्धालुओं ने माता के दिव्य और अलौकिक रूप के चरणों में विविध पुष्प, धूप, दीप, नैवद्य, नारियल और लाल चुनरी अर्पित कर परिवार के लिए मंगलकामना की। इसी क्रम में देवी कात्यायनी के संकठा जी के समीप आत्मा विश्वेश्वर मंदिर परिसर दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

दरबार में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की लम्बी कतारें लगी रही। मंगला आरती के पश्चात मंदिर के गर्भगृह का कपाट खुला। इसके बाद दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हो गया। पुष्प, नारियल, चुनरी अर्पित कर धूप व कपूर से श्रद्धालुओं ने माता रानी की आरती उतारी। इस दौरान मां के जयकारे से मंदिर प्रांगण गुंजायमान रहा। गर्भगृह में किसी ने मन्नतों की चुनरी चढ़ाई तो किसी ने झोली फैलायी।

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