गरीबों के लिए राइस एटीएम यानी चावल का एटीएम चलाते हैं रामू डोसापटी

नई दिल्ली: लॉकडाउन में सबसे बड़ी समस्या थी दो वक्त की रोटी की. लाखों लोगों बेरोजगार हो चुके थे, बहुत से लोग बेघर भी हो चुके थे. ऐसे लोगों के सामने पेट भरने की समस्या आ रही थी. हालांकि तमाम राज्य सरकारों ने गरीबों के लिए रहने और खाने का इंतजाम कर रही थीं, लेकिन जरूरतमंद आबादी के हिसाब से ये इंतजाम नाकाफी थे.

कोरोना महामारी के चलते देश में लगे लॉकडाउन में संघर्ष और सामाजिक सरोकार से जुड़ी तमाम कहानियां सामने आईं. एक तरफ जहां लोग दो वक्त की रोटी और रोजगार से जुझते दिखाई दिए वहीं ऐसे लोग भी सामने आए जिन्होंने अपना सब कुछ दाव पर लगाकर जरुरतमंदों की मदद की. ऐसे में समाज के कुछ लोग असली हीरो बनकर सामने आए और लोगों के पेट भरने का इंतजाम किया. ऐसे ही लोगों में से एक हैं हैदराबाद के रामू डोसापटी . रामू डोसापटी गरीबों के लिए राइस एटीएम यानी चावल का एटीएम चलाते हैं.

रामू डोसापटी एक कॉर्पोरेट फर्म में एचआर एक्जिक्यूटिव हैं और वे इस साल अप्रैल से ‘राइस एटीएम’ चला रहे हैं. यह चावल एटीएम भी बैंक एटीएम की तरह 24 घंटे सातों दिन काम करता है. चावल के इस एटीएम से गरीबों को चावल और अन्य खाने का राशन मुहैया कराया जाता है. सबसे अहम बात ये है कि इस एटीएम को रामू अपने पैसों से ही चलाते हैं. अब तक इस पर 50 लाख से ज्यादा रुपये खर्च हो चुके हैं.

रामू कहते हैं कि वह इस काम को बिना किसी स्वार्थ के कर रहे हैं और उन्होंने एटीएम पर खर्च हुई रकम की वापसी के बारे में कभी नहीं सोचा और ना ही कोई इरादा है. चावल एटीएम शुरू करने के पीछे रामू एक किस्सा बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनके छोटे बेटे ने अपने जन्मदिन पर चिकन (chicken) खाने की इच्छा जाहिर की. बेटे की इच्छा को पूरा करने के लिए रामू चिकन खरीदने के लिए नजदीक की दुकान पर गए. वहां उन्होंने देखा कि एक सिक्योरिटी गार्ड महिला 2000 रुपये का चिकन खरीद रही है.

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