गर्भ में पैर क्यों मारते है बच्चे ? वजह जानकर आप दंग रह जायेंगे

अगर आप किसी मां से पूछेंगे कि जब उसके गर्भ में पल रहा बच्चा पैर मारता (किक करना) है, तो उसे कैसा लगता है? तो शायद मां का जवाब होगा कि – “मेरा बच्चा मुझे पैर नहीं मार रहा बल्कि वह मेरे गले लगने की कोशिश कर रहा है।” कहा जाता है कि जब बच्चा पहली बार पेट में किक मारता है तो इसका मतलब ये होता है कि वह मातृत्व कि दुनिया में प्रवेश कर रहा है।

किसी भी औरत के लिये पहली बार मां बनने का अहसास बेहद खास होता है। यह ऐसा पल होता है जिसे वह जीवन भर नहीं भुल पाती है। 9 माहिनों के दौरान उसे अपने अंदर एक जीवन को जन्म देने की ताकत का ऐहसास होता है। जैसे-जैसे गर्भ में पल रहा भ्रूण आकार लेता है वैसे-वैसे मां बनने का सुख और तेज होने लगता है। यह ऐहसास उस वक्त और बढ़ जाता है जब बच्चा गर्भ से पहली बार लात मारता है। इसका अनुभव प्रत्येक गर्भवती स्त्री हो होता है। लेकिन, यह कम लोगों को मालूम है कि बच्चा गर्भ में पैर क्यों मारता है। इसके पिछे ये कारण होते हैं।

पहला कारण –

बच्चे का गर्भ में लात मारने का मतलब ये होता है कि बच्चे का स्वास्थ बिल्कुल ठीक है। अगर बच्चे का स्वस्थ्य अच्छा हो तभी वह पेट के अंदर से पैर मारता है।

दूसरा कारण –

दूसरा कारण यह है कि गर्भवती महिलाओं के अनुसार खाना खाने के बाद ही बच्चे का किक मारना बढ़ जाता है यानि बच्चे को भी आहार मिलता है।

तीसरा कारण –

मां के बाई ओर लेटने पर बच्चे का किक मारने की संख्या बढ़ जाती है। इसके पिछे वजह ये है कि मां के बाईं करवट लेटने पर भ्रूण को रक्त की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे बच्चा हलचल करने लग जाता है।

चौथा कारण –

बच्चे को बाहर का परिवर्तन महसूस होने पर वह तुरंत अपनी प्रतिक्रिया के रुप मं किक मारता है।

पांचवा कारण –

ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति न होने पर बच्चे की किक मारने की संख्या कम हो जाता है। इसलिए इस बात का खास ख्याल रखा जाना चाहिए।k

छठा कारण –

बच्चे के गर्भ में नौ सप्ताह पूरे होने पर वह किक मारना शुरू कर देता है। जो औरते दूसरी बार मां बनती है उनमें यह अवधि 13 सप्ताह की होती है। ये कुछ ऐसी वजहे हैं जिनसे आप जान सकते हैं कि बच्चा गर्भ में पैर या लात क्यों मारता है।

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