गांधी जी की हत्या की नई पटकथा में गोडसे को क्या कहा जाएगा?

अखिलेश अखिल


जिसने राष्ट्रपिता की हत्या कर दी हो उसे क्या कहा जाय ? आतंकवादी ही तो कहा जा सकता है। चाहे वह जिस जाति ,धर्म और समाज से ही क्यों आता हो। अभी जब गांधी जी की हत्या की पटकथा फिर से लिखने की बात चल रही है और फिर से हत्या की जांच को लेकर सवाल चल रहे हों वैसे में गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे को आजाद भारत का पहला आतंकवादी तो कहा ही जा सकता है। गांधी हत्या के दोषी गोडसे को फांसी दी गयी थी।

यह भी साफ़ है कि आज़ाद भारत में गोडसे पहला व्यक्ति था जिसे फांसी की सजा हुई। इसलिए गोडसे को आज़ाद भारत का पहला आंतकवादी कहा जाता है। गोडसे के संघ से संबंध होने की बात भी कही जाती रही है। इस बारे में कई तरह के विचार हैं। कई तरह के तर्क भी। गोडसे संघ से जुड़ा था या फिर हिन्दू महासभा का सदस्य था ,इस पर तरह तरह की बातें आती रही है लेकिन इसमें कोई हर्ज नहीं की गोडसे आजाद भारत का पहला आतंकी था जिसने राष्ट्रपिता की ह्त्या कर दी थी।

महात्मा गांधी के पौत्र तुषार गाँधी ने अपनी पुस्तक ‘लेट्स किल गाँधी” में लिखा है के गाँधी जी की हत्या पूर्वनियोजित थी और ब्राह्मणों का एक समुदाय जो हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता था, उसी ने हत्या करवाया क्योंकि वे गाँधी जी को अपने राह में रोड़ा समझता था। बता दें कि संघ की स्थापना 1925 में केशव हेडगोवार ने की थी। संघ का शीर्ष नेतृत्व शुरू से लेकर अब तक ब्राह्मणों के हाथ में रहा है। गोडसे ने गांधी को क्यों मारा पुस्तक मे व. टी. राजशेखर लिखते है कि गाँधी जी की हत्या के बारे मे संघ को पहले से ही मालूम था। जैसे ही हत्या की खबर मिली मिनटों में ही पूरे भारत मे मिठाईया संघ के द्वारा बांटी गयी। जिससे नाराज़ लोगों ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में बहुत से ब्राह्मणों के घर मे आग लगा दी थी।

गाँधी जी हत्या के समय गोवालकर मद्रास मे ब्राह्मणों के एक सभा में उपस्थित थे, उसके बाद वे नागपुर वापस आ गये। मगर 1 फरवरी 1948 को रात्रि मे उन्हे गाँधी जी की हत्या में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। 4 फरवरी को संघ पर पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया गया।

गृह मंत्री सरदार पटेल 18 जुलाई-1948 के एक पत्र मे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखा कि हमारे रिपोर्ट के अनुसार संघ और हिन्दू महासभा खासतौर से संघ ने देश में घृणा का ऐसा माहौल बनाया जिसके कारण गाँधी जी की हत्या हो गयी। 11 सितंबेर 1948 को एक और पत्र में पटेल ने लिखा के जिस तरह गाँधी जी के हत्या के बाद संघ वालों ने खुशी जाहिर की और मिठाई बांटी जिस के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ गयी, इसी कारण संघ पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।

हत्या के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ऑल इंडिया रेडियो पर आएं और उन्होंने सूचना दिया कि ”बहुत अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आज एक पागल हिन्दू ने गाँधी जी की हत्या कर दी” हम नहीं जानते कि गांधी की हत्या के बाद कुछ लोगों ने मिठाइयां क्यों बांटी थी। हम यह भी नहीं जानते कि गांधी हत्या करने वाले गोडसे और उससे जुड़े लोगों को गांधी से क्या आपत्ति थी ? देश आज तक यह भी नहीं जान पाया कि जिस गोडसे ने गांधी की हत्या कि उसकी मूर्तियां क्यों बनी ? मंदिर क्यों बने ?और अंत में उसे मिला क्या ? आजाद भारत का यह पहला हत्या काण्ड आज भी बहुत सारे सवाल खड़े कर रहे हैं।

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