गांव ने बंदर की मौत पर बहाए आंसू , गाजे बाजे से निकाली शव यात्रा, वजह जानकर भावुक हो जाओगे

 

आज के ज़माने में आपने कही नहीं देखा होगा किसी जानवर की मौत पर लोग दुखी हो, वो आंसू बहाते हो, अजी जानवरों की तो छोड़ आज वो जमाना है जब इंसान, इंसान के मरने पर दुखी नहीं होता. लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जहा गाँव के लोग बन्दर की मौत पर ना केवल आंसू बहाए बल्कि उसकी शव यात्रा भी निकाली और हिन्दू रीती रिवाजो से गांव के लोगो ने उसका अंतिम संस्कार भी किया। जी हां, दरअसल ये अनोखा मामला बिहार के समस्तीपुर जिले के सिंघिया गाँव का बताया गया है. बंदर की मौत के बाद अब ग्रामीण काफी दुखी भी है.

बता दे की आज के ज़माने में ये अनोखी कहानी दुनिया के सामने मानवता की मिसाल पेश करती है। यहां रहने वाले ग्रामीणों ने इस दौरान अनूठी मिसाल पेश करते हुए बंदर का अंतिम संस्कार पुरे सम्मानपूर्वक किया। अक्सर देखा जाता है की जब किसी जानवर की मौत हो जाती है तो लोग उसे देखना भी पसंद नहीं करते हैं, लेकिन इस गांव के लोगों ने उसकी अंतिम विदाई को बेहद खास बना दिया।

बताया जा रहा है की बंदर की मौत के बाद अब पूरा गांव शोक में डूबा है। इस दौरान उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले सभी लोगों की आँखें नम थीं। लेकिन अब यह पूरा मामला क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसके चलते सोशल मिडिया पर लोग सिंघिया गांव के लोगों की काफी तारीफ भी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, सिंहिया ब्लॉक क्षेत्र में दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक से बंदर की यह अंतिम यात्रा निकाली गई। और पूर्ण हिंदू रीति-रिवाजों के साथ इस बंदर का अंतिम संस्कार किया गया।

इस गांव के लोगो ने बताया की, ये बंदर करीब एक महीने पहले इस गांव में आया था। जब से ही गाँव वाले अक्सर उसे खाना भी खिलाते थे। और वह सभी ग्रामीणों में अच्छे से घुलमिल गया था। लेकिन एक दिन उसकी अचानक से तबियत बिगड़ने लगी। तब गांव के लोगों ने उसका इलाज भी कराया लेकिन इसका बन्दर को कोई फायदा नहीं हुआ। और इसके बाद बंदर की हालत बिगड़ती गई. और फिर उसने खाना पीना भी छोड़ दिया। इसी के चलते बंदर ने पिछले रविवार को अंतिम सांस ली। जब गांव वालो ने बंदर की मौत की खबर सुनी तो पूरे गांव में मातम छा गया।

इसके बाद सिंघिया गांव के सभी लोगों ने पूरे सम्मान के साथ बंदर को पीतांबरी समर्पित की। और इतना ही नहीं गाजे बाजे के साथ इस बंदर की शव यात्रा निकाली और गांव के श्मशान घाट ले गए। तब हिंदू रीति-रिवाजों के साथ बंदर की लाश का अंतिम संस्कार किया गया। ऐसा करके सिंघिया गांव के ग्रामीणों ने मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने एक बेजूबान के लिए जो किया है, उसने समाज में एक बड़ा संदेश दिया है।

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