गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने का किसानों से आह्वान, मुजफ्फरनगर में आज बुलाई गई पंचायत

मेरठ: दिल्ली हिंसा पर किसान नेता राकेश टिकैत के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के बाद गुरुवार को दिन भर वेस्ट यूपी के थाने छावनी बने रहे। देर शाम गाजीपुर बार्डर पर राकेश टिकैत के भावुक होने के बाद माहौल एकदम से बदल गया। मेरठ के सिसौली में नरेश टिकैत ने पंचायत कर आसपास के किसानों से गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने का अह्वान किया। उन्होंने किसानों की शुक्रवार सुबह 11 बजे मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज में पंचायत बुलाई है। नरेश टिकैत ने ट्वीट कर किसानों से सभी हाईवे पर टेंट लगाने की बात कही है। दूसरी ओर प्रशासन ने एहतियात के तौर पर दिल्ली जाने वाले हाईवे पर निगरानी बढ़ा दी है। ब्रजघाट, डासना और मेरठ-दिल्ली हाईवे पर फोर्स ने डेरा डाल दिया है। बुलंदशहर में जिले की सीमाएं सील करते हुए किसानों के मूवमेंट पर रोक लगा दी है। राकेश टिकैत के खिलाफ बलवे और हत्या के प्रयास आदि गंभीर धाराओं में बुधवार को दिल्ली में मुकदमा दर्ज हुआ था। सवेरे भाकियू ने ऐलान किया कि थानों पर धरना प्रदर्शन होगा। इसी घोषणा के बाद सभी थानों को छापनी में तब्दील कर दिया गया। यह बात अलग रही कि कहीं बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ। कुछ जगह सिर्फ ज्ञापन ही दिए गए

बागपत के बड़ौत में हाईवे पर चल रहे किसानों के धरने को बुधवार रात पुलिस ने बलपूर्वक हटवा दिया था। गुरुवार को नगर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। धरने का संचालन करने वाले थाम्बा चौधरी ब्रजपाल सिंह ने कहा कि पुलिस ने धरनारत किसानों के साथ बर्बरता की है। किसान दोगुनी ताकत से दोबारा आंदोलन करेंगे। किसान आंदोलन में राजधानी से भारतीय किसान यूनियन (भकियू) के नेताओं का आना-जाना लगातार जारी है। 15-20 किसानों का एक जत्था आता है तो एक फिर दिल्ली बॉर्डर की ओर निकल जाता है। किसान नेताओं की मानें तो लखनऊ से करीब 40-50 किसान व नेता गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार बने हुए हैं। इनमे बाराबंकी के कुछ किसान भी इनके साथ हैं। किसानों का एक दल तीन-चार दिन रुकने के बाद लौटता है तो दूसरा दल चल देता है। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा बताते हैं कि वह 27 जनवरी को लौटे हैं। 30 जनवरी को फिर दिल्ली निकल जाएंगे।

मुरादाबाद मंडल के कई किसान नेता और उनके साथ गए किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के बाद या तो लौट आए हैं या धरने में होने के बाद भी नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गए हैं। कई नेता भूमिगत हो गए हैं। माना जा रहा है कि दिल्ली उपद्रव के बाद सरकार के सख्त तेवर के कारण वे सामने आने से बच रहे हैं। रामपुर के बिलासपुर में बुधवार को उस समय अचानक तनाव की स्थिति बन गई जब बड़ी संख्या में अफसर फोर्स के साथ इलाके के किसानों का नेतृत्व करने वाले नवाबगंज गुरुद्वारा के बाबा अनूप सिंह से मिलने पहुंचे। उनकी गिरफ्तारी की अफवाह पर सैकड़ों की संख्या में सिख समाज के लोग गुरुद्वारे पहुंच गए। अलीगढ़ से दिल्ली के चिल्ला व गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल होने गए हुए थे। अब दिल्ली कांड के बाद भाकियू भानू गुट व भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले गए किसान वापस आ चुके हैं। टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष विमल तोमर ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व के फैसले का इंतजार है। संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्रीय संगठन के अनुसार एक दिन के उपवास के लिए शुक्रवार को बैठक बुलाई है।

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