गिरोह वाली राजनीति में दागी मुकुल रॉय, हिमंत बिस्व शर्मा बीजेपी के ध्वजवाहक

अखिलेश अखिल

नई दिल्ली: बीजेपी में एक नेता है मुकुल राय। वह किसी समय ममता बनर्जी के सबसे बड़े विश्वासपात्र थे, उनके बेहद क़रीब थे। वह तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे और पार्टी के कोटे से रेल मंत्री भी बने थे। तृणमूल सांसद कुणाल घोष ने सारदा घोटाले में हुई पूछताछ के दौरान 2014 में राय का नाम लिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने दिसंबर 2014 में मुकुुल राय के ख़िलाफ़ जाँच शुरू की और 30 जनवरी 2015 को पहली बार उनसे पूछताछ की। कई बार की पूछताछ के बाद केंद्रीय जाँच एजेन्सी ने मुकुल राय को सारदा घोटाले में अभियुक्त बनाया। राय 3 नवंबर, 2017 को बीजेपी में शामिल हो गए। उसके बाद सीबीाई ने उन्हें एक बार भी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया।

इसी तरह सारदा समूह के अध्यक्ष सुदीप्त सेन ने पूछताछ के दौरान कहा था कि उनकी कंपनी असम कांग्रेस के नेता हिमंत बिस्व शर्मा को हर महीने 20 लाख रुपये दिया करती थी। इस तरह बिस्व शर्मा का नाम पहली बार सारदा चिटफंड मामले में आया। सीबीआई ने 26 नवंबर 2014 को पहली बार उनसे पूछताछ की। असम विधानसभा चुनाव के पहले हिमंत ने कांग्रेस छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। उसके बाद से अब तक सीबीआई ने पूछताछ के लिए उन्हें फिर कभी नहीं बुलाया।

सवाल यह उठता है कि जिस बीजेपी की सरकार कोलकाता के पुलिस प्रमुख की गिरफ़्तारी और उनसे पूछताछ के लिए हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी करती है ताकि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ा जा सके, वही बीजेपी उन सारे लोगों को क्यों पार्टी में शामिल करती है जिनके ख़िलाफ़ घोटाले और जबरन वसूली जैसे गंभीर आपराधिक आरोपों की जांँच चल रही है। सवाल यह भी है कि राजीव कुमार के ख़िलाफ़ अचानक इनती मुस्तैदी दिखाने वाली सीबीआई ने मुकुल राय और हिमंत बिस्व शर्मा से उनके बीजेपी में शामिल होने की तारीख़ के बाद से अब तक कोई पूछताछ क्यों नहीं की। क्या बीजेपी सीबीआई का इस्तेमाल कर विरोधी दलों के नेताओं को पहले डराती है और फिर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करा कर उनके मामले को ठंडे बस्ते में डाल कर उन्हें एक तरह का अभयदान देती है।

अब एक नया चेहरा बीजेपी को मिला है। किसी ज़माने में ममता बनर्जी की बहुत नज़दीकी रही पूर्व आईपीएस अफ़सर भारती घोष का बीजेपी में शामिल होना और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का उनका स्वागत करना अलग ‘चाल चरित्र और चेहरे’ का दावा करने वाली पार्टी के सामने कई सवाल खड़े करता है। भारती घोष पर जबरन वसूली करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप हैं। सीआईडी ने उनके कई फ़्लैटों पर छापे मारे थे और 2.4 करोड़ रुपये नकद बरामद किए थे।

भारती घोष के बीजेपी में शामिल होने का समय और ज़्यादा महत्वपूर्ण इृसलिए भी है कि वह पार्टी में ठीक उसी समय हुईं जब सारदा चिटफंड घोटाले की जाँच करने वाले आईपीएस अफ़सर राजीव कुमार को गिरफ़्तार करने पर आमादा केंद्र की बीजेपी सरकार ने संवैधानिक संकट खड़ा करने तक की परवाह नहीं की थी। रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भारती घोष पर जबरन वसूली करने और पति के साथ मिल कर आपराधिक साजिश रचने के आरोप हैं। सीआईडी उनके मामले की जाँच कर रही है और उनके पति एम. ए. वी. राजू फ़िलहाल जेल में हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ------------------------- ------------------------------------------------------ -------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------- --------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------   ----------------------------------------------------------- -------------------------------------------------- -----------------------------------------------------------------------------------------
----------- -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper