गुड बैक्टीरिया से यूपी की नदियां होंगी साफ़ : पांडेय

लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश की सभी दूषित नदियों व गंदे नालों को कुछ मशीनों और गुड बैक्टीरिया से बिल्कुल साफ करने का दावा किया जा रहा है। इसका पहला प्रयोग मनकामेश्वर मंदिर के सामने स्थित नाला पर अमेरिकन कंपनी ऑइल स्पिल ईटर इंटरनेशनल कार्पोरेशन व उत्तर प्रदेश जल निगम ने किया।

अमेरिकन कंपनी के चेयरमैन स्टीवन पैडिगो व टैलीमाकस हाईटेक कार्पोरेशन के मैनेजिंग पार्टनर राजेश आर पांडेय ने बुधवार को एक निजी होटल में पत्रकार वार्ता में बताया कि पायलट प्रयोग के तहत गंदे पानी को स्वच्छ करने के लिये अत्याधुनिक मशीनों व एन्जाइम का प्रयोग किया जाएगा।

उन्होंने दावा कि गुड बैक्टीरिया के साथ नाले का गंदा, मलयुक्त पानी कुछ ही मिनटों में साफ और स्वच्छ हो जाता है।
स्टीवन ने बताया कि इस प्रयोग के लिए नाले के पानी को रोककर उसमें विशेष तरह की मशीनें लगाई गयी हैं। पूरी गंदगी को तोड़-फोड़कर एक-एक बैक्टीरिया के साथ मिलकर तुरंत स्वच्छ कर देती हैं और नाले का पानी एकदम साफ होकर नदी में प्रवाहित हो जाता है।

राजेश आर पांडेय ने बताया कि यह प्रयोग अभी फिलहाल गोमती नदी की सफाई के लिए एक एसटीपी पर किया जा रहा है। प्रमाणित होने के बाद जल निगम के साथ मिलकर अन्य जगहों पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी कुम्भ में नदी को स्वच्छ रखने के लिए यह प्रयोग मील का पत्थर साबित हो सकता है।

गोमती नदी में मनकामेश्वर मंदिर के सामने हो रहा प्रयोग

इस पूरी प्रक्रिया का प्रयोग बुधवार को गोमती तट पर किया गया। जिसमें प्रमुख सचिव जल निगम मनोज कुमार सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर जल निगम ए के श्रीवास्तव, चीफ इंजीनियर गंगा अजय रस्तोगी, अनिल कुमार जिंदल चीफ इंजीनियर लखनऊ, जीएम लखनऊ एस के गुप्ता, सौरभ श्रीवास्तव प्रोजेक्ट मैनेजर गोमती, पीके पुंडीर प्रोजेक्ट इंजीनियर गोमती, अंजू वर्मा असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर गोमती और अन्य ने निरीक्षण किया। इस प्रोजेक्ट के दीर्घकालिक परिणामों को लेकर चर्चा हुई।

स्टीवन ने बताया कि उनकी कंपनी दुनिया के 102 देशों में 42 हजार से अधिक नालें और नदियों की सफाई के प्रोजेक्टस को (अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जैम्बिया, मैक्सिको, नाइजीरिया आदि में) मूर्त रूप दे रही है। कंपनी का दावा है कि कैमिकल के द्वारा ही गंदगी को कार्बन डाई ऑक्साइड और पानी में बदल कर गंदगी को जाने से रोकती है। उन्होंने बताया कि इस प्रयोग से जलीय जंतु या पर्यावरण पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। यह बिल्कुल जैविक प्रयोग है।

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