ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा में आया सैलाब, तबाही के 24 घंटे बाद भी 100 से ज्यादा लोग लापता

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट जाने के कारण ऋषिगंगा घाटी में अचानक विकराल बाढ़ आ गई। हालांकि ऋषिगंगा में आई जल प्रलय का वेग अलकनंदा नदी में आते-आते थम गया। इस कारण नदी तट पर बसे शहरों और कस्बे इसके प्रकोप से बच गए। इसके मुकाबले 2013 में आई आपदा से सभी जगह सतर्क दिखाई दिया तत्काल ही पुलिस-एसडीआरएफ की टीमों ने नदी तटों पर लोगों को आगाह किया।

तपोवन से लेकर हरिद्वार में स्थित गंगा के मैदानी तटों को खाली कराया गया। लेकिन राहत की बात यह रही कि ऋषिगंगा और धौली गंगा की संकरी और तेज ढलान वाली घाटी में उफानाती बाढ़, अलकनंदा की अपेक्षाकृत ज्यादा चौड़ी तटों पर आकर शांत होने लगी। यही कराण है कि जानमाल का नुकसान अलकनंदा तट पर ही देखने को नहीं मिला।

सुबह 11 बजे टूटे ग्लेशियर से पैदा बाढ़ दोपहर बाद 2:30 बजे कर्णप्रयाग से होकर गुजरी। इस दौरान नदी का पानी, बरसाती बाढ़ की तरह मटमैला तो नजर आया लेकिन नदी के जल स्तर में एक मीटर की ही बढ़ोत्तरी देखने को मिली। फिर शाम 5:30 बजे बाढ़ का पानी रुद्रप्रयाग संगम से होकर गुजरा तो यहां भी हालात सामान्य ही रहे। इस दौरान रुद्रप्रयाग में नहीं का जल स्तर 80 सेमी ही बढ़ा हुआ मिला। श्रीनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार, जैसे शहर शाम होते-होते आपदा के खौफ को पीछे छोड़ते हुए सामान्य जनजीवन पर लौट आए। जबकि 2013 की आपदा के दौरान केदारघाटी से लेकर श्रीनगर तक जानमान की व्यापक तबाही हुई थी।

चमोली जिले की चीन सीमा से जुड़े क्षेत्र में रविवार को एक ग्लेशियर के टूटन जाने से भारी तबाही मच गई। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अलावा एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना राहत और बचाव में जुटी हैं। बता दें कि अबतक 10 शव मिल चुके हैं जबकि 153 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 12 लोगों को कल रेस्क्यू कर लिया गया था।

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