घर बैठे एक क्लिक से जानिए लोन से जुड़ी हर जानकारी

अपना घर हर व्यक्ति का सपना होता है। यह वित्तीय सुरक्षा, आयकर में राहत, इमरजेंसी में सपोर्ट सिस्टम और अपनी पसंद के हिसाब से रहने की सुविधा देता है। अगर आपके पास घर खरीदने के लिए रकम नहीं है तो बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFC) आपको लंबी अवधि का कर्ज देती हैं। मासिक किस्त के रूप में एक निश्चित रकम बैंक या NBFC को चुकाते हुए आप 10, 20 या 30 साल की अवधि में कर्ज की मूल रकम और ब्याज को लौटा देते हैं। इसे ही होम लोन कहा जाता है।

अलग-अलग जरूरतों के आधार पर लोन कई प्रकार का होता है। लोन के कुछ प्रकार निम्न हैं…

होम लोन : घर बनाने के लिए लिया जाने वाला लोन, होम लोन कहलाता है, जोकि काफी रियायती दरों पर उपलब्ध होता है, क्योंकि गवर्नमेंट द्वारा सब्सिडी मिलने के कारण बैंक और फाइनेंस कंपनियां कम रेट ऑफ़ इंटरेस्ट पर उपलब्ध कराती हैं। यह सुरक्षित लोन माना जाता है क्योंकि इस लोन के लिए ग्राहक को अपने घर के पेपर (जमीन की रजिस्टरी) बैंक में गिरवी रखने होते हैं।

होम लोन लेने की पात्रता इस तरह निर्धारित की जाती है:

  • किसी व्‍यक्ति को उसकी प्रति माह की कुल आय का 60 गुना लोन मिल सकता है।
  • अगर आपने कोई दूसरा लोन (कार या पर्सनल लोन आदि) लिया है, जो चालू है तो लोन देने वाला बैंक उसकी मासिक किस्त आपकी आमदनी से घटाने के बाद होम लोन की रकम पर विचार करेगा।
  • अगर आप होम लोन लेना चाहते हैं और आपका क्र‍ेडिट स्‍कोर सही नहीं है या आपके पिछले किसी लोन/उधार के भुगतान में चूक हुई है तो बैंक लोन देने से मना कर सकता है।
  • आप लंबी अवधि के लिए लोन लेकर अपनी पात्रता ठीक कर सकते हैं।
  • अगर आप सैलरीड इम्पलॉई हैं या आप निजी व्‍यवसाय करने वाले व्‍यक्ति हैं तो दोनों के लिए लोन की पात्रता अलग-अलग होती है।

आमतौर पर बैंक आपकी कुल मासिक आय के 40 फीसदी रकम को व्‍यक्तिगत खर्च के लिए जरूरी मानते हैं। इसके बाद बची रकम के हिसाब से होम लोन दिया जाता है। मसलन अगर आपकी मासिक आमदनी 60,000 रुपये है तो बैंक यह मानता है कि आपका पर्सनल खर्च 25,000 रुपये महीना होगा। अगर आपने कार या पर्सनल लोन जैसा कोई और लोन नहीं लिया है तो आप 20 साल के लिए 9 फीसदी सालाना ब्याज दर पर होम लोन के रूप में 35-40 लाख रुपये तक पा सकते हैं।

होम लोन के बारे में जानें 5 बड़ी बातें

  1. होम लोन क्यों लेना चाहिए?
  2. होम लोन लेने से वास्तव में आपको तीन सुविधा होती है।
  3. निवेश के लिहाज से संपत्ति खरीदना।
  4. इनकम टैक्स में बचत।
  5. रहने में सुविधा।

अगर आप होम लोन लेकर अपना घर घर खरीदते हैं तो समय के साथ आपके घर की कीमत में इजाफा होता रहता है। यह वास्तव में निवेश का एक प्रकार भी है। संपत्ति की कीमत बढ़ने की रफ्तार हालांकि उस इलाके की कनेक्टिविटी, मांग-आपूर्ति की स्थिति और रहने वाले लोगों की आमदनी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

होम लोन की मासिक किस्त के रूप में चुकाई जाने वाली रकम में मूलधन और ब्याज दोनों ही होता है। अगर आप मूलधन के हिसाब से सोचें तो इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80सी के तहत आप साल भर में 1.5 लाख रुपये के भुगतान पर आयकर में राहत पा सकते हैं। इसके साथ ही आपने होम लोन की किस्त में ब्याज के रूप में जो रकम चुकाई है उसके लिए साल में दो लाख रुपये तक की रकम पर अलग से इनकम टैक्स में छूट मिलती है। अगर आप अपने घर में रहते हैं तो नौकरी या कारोबार, किसी भी लिहाज से आप होम शिफ्टिंग के झंझट से मुक्त रहकर अपने काम पर पूरा ध्यान दे सकते हैं।

प्लॉट लोन

ग्राहक द्वारा घर बनाने के लिए खरीदी जाने वाली जगह या प्लॉट को खरीदने के लिए लिया जाने वाला लोन, प्लॉट लोन कहलाता है। कुछ प्राइवेट फाइनेंस कंपनी द्वारा यह लोन उपलब्ध कराया जाता है। इस लोन को जमीन की रजिस्ट्री करने से पहले अप्लाई करा जाता हैं व रजिस्ट्री के बाद जमीन के पेपर बैंक अपने पास रख लेता है।

इन बातों पर ध्यान दें

एक प्लाट लोन के तहत बैंक कुछ शर्तें रख सकता है। जैसे की आपको निर्धारित अवधि (2 से 5 साल) के अन्दर प्लाट पर घर का निर्माण करना होगा।

एसबीआई रियल्टी होम लोन (स्टेट बैंक प्लाट लोन) में आपको प्लाट लोन लीं के 5 वर्ष के अन्दर प्लाट पर घर का निर्माण करना होता है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो स्टेट बैंक आपके ऊपर पेनल्टी लगा सकता है और आप से लोन का फटाफट पूर्ण भुगतान करने को कह सकता है।

प्लाट लोन आपको फिक्स्ड (fixed) और फ्लोटिंग (floating) ब्याज दरों पर मिल सकता है। जैसे की HDFC प्लाट लोन में आपको दोनों तरह के ब्याज के विकल्प मिलते हैं। हालांकि, fixed इंटरेस्ट रेट केवल कुछ ही वर्षों के लिए होता है। 3 वर्षों के बाद, फिक्स्ड रेट लोन स्वचालित रूप से फ्लोटिंग रेट लोन में परिवर्तित हो जाता है। खरीदे गए प्लाट पर बैंक सेकुरिटी बनाएगा।

प्लाट खरीदने के लिए कितना लोन मिल सकता है?

हर बैंक ले नियम अलग हो सकते हैं। लोन राशि प्लाट की market value (बाज़ार मूल्य) पर भी निर्भर करती है। बैंक आपको market value की 70 फीसदी राशि तक का लोन दे सकते हैं। होम लोन में आपको ज्यादा लोन मिल जाता है।

प्लाट लोन की ब्याज दर और भुगतान अवधि कितनी होती है?

आप प्लाट लोन इंटरेस्ट रेट (plot loan interest rate)  को होम लोन की ब्याज दर से आसपास होने की उम्मीद कर सकते हैं। प्लाट लोन की भुगतान अवधि होम लोन की भुगतान अवधि से कम होती है। जैसे की SBI Home  लोन की भुगतान अवधि 30 वर्ष तक हो सकती है, परन्तु स्टेट बैंक प्लाट लोन की भुगतान अवधि (repayment tenure) केवल 10 वर्ष है। दुसरे बैंकों में भी भुगतान अवधि 10-15 वर्ष ही है। कम भुगतान अवधि का मतलब ज्यादा EMI। आपको सुनिश्चित करें कि आप इस लोन का भुगतान कर सकते हैं। ध्यान दें आपको प्लाट लोन के बाद होम लोन भी लेना होगा। होम लोन की EMI के भुगतान भी करना होगा।

प्लाट लोन : टैक्स बेनिफिट (Plot Loan Tax Benefit)

हम सभी जानते हैं की होम लोन के भुगतान पर सेक्शन 80सी और Section24 के तहत टैक्स बेनिफिट मिलते हैं। परन्तु प्लाट लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता। एक बार आपके घर बन जाता है, तब आप अपने प्लाट लोन को होम लोन में बदलने का आवेदन कर सकते हैं। उसके बाद आप टैक्स बेनिफिट ले पायेंगे। अगर आपका लोन प्लाट खरीदना और घर बनाने दोनों के लिए है, तब आप उस लोन पर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं। ध्यान दें टैक्स बेनिफिट तभी मिलना शुरू होंगे जब की आपके घर का निर्माण पूरा हो जाएगा। एक होम लोन में भी ऐसा हो होता है।

प्लाट लोन के लिए आवेदन कैसे करें? क्या डाक्यूमेंट्स चाहिए?

आपको आवेदन करने के लिए इन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ेगी।

  • पहचान प्रमाण (Identity proof जैसे की PAN, पासपोर्ट, आधार, राशन कार्ड इत्यादि)
  • पते का प्रमाण (Address proof जैसे की पासपोर्ट, बिजली/टेलीफोन बिल, आधार इत्यादि)
  • आय का प्रमाण (बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, इनकम टैक्स रिटर्न इत्यादि)
  • फोटो

ध्यान दें लोन देने से पहले बैंक आपकी ज़मीन के बारे में भी तहकीकात करेगा और सुनिश्चित करेगा की इस प्लाट पर कोई विवाद तो नहीं चल रहा।

लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी

किसी घर (रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी) या शॉप (कमर्शियल प्रॉपर्टी) के रजिस्ट्री के पेपरों को बैंक या फाइनेंस कंपनी में गिरवी रखकर पर्सनल काम या बिज़नस बढ़ने के लिए लिया जाने वाला लोन ही लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी कहा जाता है। मूलतः यह लोन बिज़नस मैन को अपना बिज़नस बढ़ाने के लिए दिया जाता है।

Loan against property और एक पर्सनल लोन में क्या अंतर है?

जैसा की ऊपर लिखा है, LAP एक सुरक्षित लोन (secured loan) है। पर्सनल लोन एक असुरक्षित लोन (unsecured loan) है। इसीलिए प्रॉपर्टी लोन मिलना की संभावना ज्यादा हो सकती है। ब्याज दर भी पर्सनल लोन से कम होगी। पर्सनल लोन आपको 5-10 लाख से ज्यादा का नहीं मिलेगा। पर प्रॉपर्टी पर आपको 5-10 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता हैं। पर्सनल लोन की अवधि 3-5 वर्ष से ज्यादा की नहीं होगी। इसके विपरीत एक प्रॉपर्टी लोन की अवधि 15 वर्ष तक हो सकती है। प्रॉपर्टी लोन में आपको अपनी प्रॉपर्टी गिरवी रखनी होगी। ऐसा करने के कुछ पेपर वर्क (paper work) करना होगा। इसीलिए प्रॉपर्टी पर लोन लेने में समय ला सकता है। इसीलिए थोडा समय लग सकता है।

इसके विपरीत पर्सनल लोन आपको फटाफट मिल जाता है।

  • प्रॉपर्टी लोन और होम लोन में क्या अंतर है?
  • आप एक घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लेते हैं।
  • प्रॉपर्टी पर लोन के मामले में, आप पहले से ही संपत्ति के मालिक हैं।
  • प्रॉपर्टी लोन में आप संपत्ति को गिरवी रखते हैं और लोन राशि का किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग करते हैं।
  1. शिक्षा
  2. चिकित्सा उपचार
  3. शादी
  4. व्यापार की आवश्यकताओं
  5. किसी दूसरे लोन का भुगतान
  6. या कोई भी अन्य उद्देश्य

बैंक आपके उपयोग करने पर प्रतिबंध नहीं लगाते हैं। बस आप इस पैसे को speculative काम की लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते और इस बात के आपको बैंक को एक घोषणापत्र (undertaking) देना होगा। अपनी प्रॉपर्टी पर कितना लोन ले सकते हैं?

बैंक आपको 5-10 कोर्ड रुपये तक का लोन दे सकते हैं। हर बैंक की अलग पालिसी हो सकती है।

पर, लोन की राशि प्रॉपर्टी के मूल्य (market value) पर निर्भर करेगी।

लोन देने से पहले बैंक आपकी प्रॉपर्टी के मूल्य का आंकलन करता है।

आपको अपनी प्रॉपर्टी के मूल्य के 50-70 फीसदी तक की राशि का लोन मिल सकता है।

साथ ही बैंक इस बात पर भी ध्यान देते हैं की आप कितने लोन का भुगतान कर सकते हैं (repayment ability)। बशर्ते आपकी प्रॉपर्टी का मूल्य 1 करोड़ रुपये हो, पर अगर आप अपनी आय पर केवल 10 लाख के लोन का भुगतान कर सकते हैं, तो बैंक आपको 10 लाख से ज्यादा का लोन नहीं देगा।

संक्षेप में, बैंक इन निम्नलिखित बातों पर विचार करेगा।

  • प्रॉपर्टी का बाजार मूल्य (market value of property)
  • आपकी प्रॉपर्टी के कागज़ सही और पूरे होने चाहिए।
  • आपकी आयु (न्यूनतम और अधिकतम आयु पर सीमा हो सकती है)
  • आप सैलरी पाते हैं और स्वरोजगार हैं (salaried or self-employed)
  • आपका वेतन या वार्षिक आय
  • आपका सिबिल (क्रेडिट) स्कोर, जितना ज्यादा है, उतना बेहतर है
  • आपके दूसरे लोन

प्रॉपर्टी लोन पर कितना ब्याज (इंटरेस्ट रेट) देना पड़ सकता है?

प्रॉपर्टी लोन पर ब्याज दर स्थिर नहीं रहती। लोन लेते समय ही आपको ब्याज दर चेक करनी होगी। साथ ही यह लोन एक फ्लोटिंग रेट लोन (floating rate loan) है। आपकी लोन अवधि के दौरान भू लोन की ब्याज दर बदल सकती है।

आप विभिन्न बैंक से बात करके सबसे कम ब्याज दर वाला लोन ले सकते हैं।

  • SBI प्रॉपर्टी लोन (SBI loan against property) की ब्याज दर जानने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं।
  • प्रॉपर्टी पर मिलने वाले लोन की अवधि 15 वर्ष तक भी हो सकती है।
  • प्रॉपर्टी पर लोन कैसे लें? किन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ेगी?
  • आपको बैंक या NBFC जाना होगा और वहाँ जा कर आवेदन करना होगा।
  • हालांकि बैंकों और एनबीएफसी में दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है, मैं कुछ प्रमुख दस्तावेजों का यहाँ जिक्र करूंगा।
  • उधारकर्ता की पहचान और पता प्रमाण (Identity and address proof of the borrower)
  • वेतन स्लिप, फॉर्म -16 (अगर आप सैलरी पाते हैं)
  • बैंक विवरण, आयकर रिटर्न, सर्टिफाइड फाइनेंसियल स्टेटमेंट (अगर आप self-employed हैं)
  • आपकी प्रॉपर्टी के कागज़ात (property papers)

इन डाक्यूमेंट्स को तैयार रखें।

क्या प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?

नहीं, प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर आपको कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता। न तो आपको ब्याज के भुगतान (interest payment) पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है और न ही मूल के भुगतान (principal repayment) पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है।

प्रॉपर्टी लोन लेते समय किन बातों का ख्याल रखें?

अच्छी बात यह है की पआपके पास प्रॉपर्टी लोन लेने का विकल्प है परन्तु लोन लेने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखें।

आपने लोन लिया है, तो चुकाना भी होगा। तो लोन लेने से पहले यह बात ज़रूर सुनिश्चित कर लें। अगर लोन नहीं चुकाया, तो बैंक प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर उसे बेच देगा और अपना लोना वसूल लेगा।

इसीलिए अगर आपकी आर्थिक स्तिथि अच्छी नहीं है, तो बेहतर होगा की आप प्रॉपर्टी पर लोन लेने की बजाय उसे बेच दें। कम से कम ब्याज तो बचेगा।

लोन का ब्याज आपकी एक मात्र लागत नहीं है। प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन फीस, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन फीस (मूल्यांकन शुल्क), कानूनी शुल्क आदि जैसे कई और खर्चे भी आपको उठाना होंगे।

हालांकि प्रॉपर्टी लोन का ब्याज दर पर्सनल लोन से कम होने की उम्मीद है, आप पर्सनल लोन के लिए भी कोशिश करें} क्या पता आपको पर्सनल लोन ही सस्ता मिल जाए।

अगर बच्चों की पढाई के लिए लोन ले रहे हैं, तो शिक्षा लोन के लिए कोशिश करें। एजुकेशन लोन सस्ता भी होगा और भुगतान पर टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगे।

बैंक या NBFC का फैसला करने से पहले 2-3 जगह ब्याज दर और अन्य शुल्कों का पता कर लें।

पर्सनल लोन

सबसे पहले बात करते है कि पर्सनल लोन (Personal Loan) क्या होता है तो ये बैंक द्वारा दिए जाने वाला पर्सनल लोन होता है। इस लोन को बैंक आपके अच्छे क्रेडिट स्कोर के आधार पर प्रोवाइड करती है इस लोन में दो चीजे मुख्य होती है एक आपके फेवर में होती है दूसरी आपके अगेंस्ट होती है। पहली ये है कि पर्सनल लोन बहुत कम दस्तावेज में मिल जाता है इसके लिए आपको प्रॉपर्टी के कागजात गोल्ड के कागजात जैसे बड़े दस्तावेज की जरुरत नहीं पड़ती है बल्कि इसमें नार्मल से दस्तावेज की जरुरत पड़ती है।

दूसरी बात आपके अगेंस्ट होती है और वो ये है कि इसका ब्याज दर दूसरे लोन की तुलना में काफी ज्यादा होता है। अगर आप होम लोन लेना चाहते है या फिर गोल्ड लोन लेना चाहते हैं तो इनका इंटरेस्ट रेट यानी ब्याज दर काफी कम होता है जबकि पर्सनल लोन (Personal Loan) का इंटरेस्ट रेट काफी हाई होता है। पर्सनल लोन (Personal Loan) में किन किन दस्तावेज की जरुरत होती है।

पर्सनल लोन (Personal Loan) क्या है ये तो आप जान गए होंगे अब आपको बताते है कि Personal Loan में किन किन दस्तावेज की जरुरत होती है। देखा जाए तो बैंक पर्सनल लोन के लिए दो चीजे कन्फर्म करते है पहला ये है कि आपका क्रेडिट स्कोर 750 से 900 के बीच होना चाहिए अब आप जानना चाहते होंगे के क्रेडिट स्कोर क्या होता है तो आपको बता दे कि अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड है तो आप उसका बिल कैसे चुकाते हैं या फिर अगर आपने पहले से लोन लिया हुआ है तो आप उसकी EMI कैसे चुकाते हैं अगर आप इन सभी को टाइम पर चुकाते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर काफी अच्छा बना रहता है।

पर्सनल लोन देने से पहले बैंक दूसरी चीज ये देखते हैं कि आप उस लोन को चुकाने की कैपेसिटी रखते है यां नहीं। इसके लिए बैंक दो चीज देखते है पहली ये कि आप सेलरिड हैं दूसरी आप सेल्फ एम्प्लोय हैं। अगर आप सेलरिड यानी नौकरी वाले आदमी है तो बैंक बहुत आसानी से आपको लोन दे देती है। इसमें बैंक आपसे तीन महीने की सेलरी स्लिप लेती है। सेल्फ एम्प्लोय में बैंक आपसे आपके काम और ऑफिस की जानकारी लेती है। तो अगर आप इन जरुरत को पूरा कर देते हैं तो आपको आसानी से लोन मिल जाता है।

पर्सनल लोन (Personal Loan) कैसे ले

यह लोन दो तरह से मिलता है पहला जिसमे बैंक खुद आपको Personal Loan लेने के लिए कहती है। जैसे HDFC Bank या AXIS Bank अपने नेट बैंकिंग ग्राहकों को पर्सनल लोन देने का ऑफर करती हैं। ये बैंक आपके क्रेडिट स्कोर को पहले से ही चेक कर लेती है। इसके बाद ही आपको लोन लेने के लिए कहती हैं। अगर बैंक खुद आपसे पर्सनल लोन लेने के लिए कहती है तो ऐसी स्थिति में आपको काफी आसानी से लोन मिल जाता है।

अगर बैंक खुद से लोन न दे तो ऐसे में आपको पर्सनल लोन के लिए खुद से अप्लाई करना होता है इसके लिए आपको बैंक जाकर एक लोन का एक फॉर्म भरना होता है जिस बैंक में आपका अकाउंट है आपको वहां पर ही जाना चाहिए कि वहां आपको लोन लेने में थोड़ी आसानी हो जाती है। तो लोन के फॉर्म के साथ आपको अपना आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ लगाना होता है इसमें आप अपना आधार कार्ड और पैन कार्ड लगा सकते हैं इसके साथ आपको सेलरी की स्लिप और आपके काम और ऑफिस की जानकारी भी अटेच करनी होती है। तो इन दस्तावेजों से आप Personal Loan ले सकते हैं।

तो अब आप जान गए होंगे कि Personal Loan क्या है पर्सनल लोन कैसे ले इस लोन को लेना काफी आसान होता है क्योंकि इसमें बहुत कम दस्तावेजों की जरुरत पड़ती है हालाकि इसमें आपको काफी ज्यादा ब्याज देना पड़ता है। लेकिन आप इस लोन को लेकर पर्सनल जरुरत को पूरा कर सकते हैं। पर्सनल लोन का फैसला आपको काफी सोच समझकर लेना चाहिए अगर आपके पास कोई प्रॉपर्टी के कागजात या गोल्ड नहीं है तो इसके बाद ही आपको इस लोन के लिए अप्लाई करना चाहिए।

कार या बाइक लोन

बैंक अक्सर कार खरीदने के लिए लोन के तौर पर तरह-तरह के स्कीम प्रस्तुत करते हैं। ये लोन बाकी अन्य लोन की भाँति अलग-अलग समय के लिए फिक्स्ड या फ्लोटिंग रेट (floating rate) पर ऑफर किए जाते हैं। आपको पता है फिक्स्ड या फ्लोटिंग रेट (floating rate) क्या होता है? नहीं पता तो मैं बताता हूं।

फिक्स्ड रेट (fixed rate) मतलब fixed interest rate। जब आप लोन उठा रहे होते हो तो उस समय जो ब्याज दर लागू है। वहीं दर पूरे लोन चुकाने तक लागू रहेगा। Floating rate वह रेट है जो समय आने पर बदल भी सकती है (कम या ज्यादा) और उसी के अनुसार आपके लोन का भी इंटरेस्ट रेट कम या ज्यादा होता रहेगा। बैंक आपसे लोन देने के पहले पूछ लेती है कि आप फिक्स्ड या फ्लोटिंग रेट पर लोन लेना चाहते हैं? जब तक लोन का पूरा पेमेंट नहीं हो जाता, तब तक कार पर स्वामित्व (propriety right) लोन बैंक के पास होता है। आपको बैंक में अपनी सैलरी स्लिप (salary slip) और पिछले दो या तीन साल का इनकम टैक्स रिटर्न (income-tax return) जमा करनी पड़ेगा। इसके अतिरिक्त कोई identity proof और address proof भी जमा करना होगा। नई कारों के लिए इंटरेस्ट रेट और दूसरे चार्ज यूज्ड कार से अलग होता है।

एजुकेशन लोन

हर मेधावी छात्र के नसीब में नहीं होता है कि वह मनचाहे संस्थान से पढ़ाई कर पाए। कोई ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करना चाहे तो उसे पैसे की दिक्कत आ सकती है। सब अम्बानी के खानदान से नहीं होते। फी ही इतनी होगी कि वहां जाकर पढ़ाई करने की सोचना खयाली पुलाव बनाने के जैसा होगा। ऐसी स्थिति में वह बैंक में एजुकेशन लोन (Education loan) के लिए अप्लाई कर सकता है। बैंक एजुकेशन लोन देने से पहले उसकी रिपेमेंट सुनिश्चित करता है। देखा गया है कि लोन उन्हीं छात्रों को दिया जाता है जो इसे वापस करने की क्षमता रखते हैं। पर उनकी क्षमता की जांच कैसे होगी? या तो उनके अभिवावक के वेतन को देखा जायेगा या फिर लोन लेने वाला छात्र किस विश्वविद्यालय में जा रहा है? वहां से पढ़कर वह कमाएगा या नहीं? वहां कैंपस सिलेक्शन का रेश्यो क्या है? यह सब देखकर ही बैंक लोन अप्रूव करती है। पढ़ाई खत्म करने के बाद छात्र रिपेमेंट कर सकता है। लोन लेने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ती है। गारंटर लोन लेने वाले का अभिभावक या फिर रिश्तेदार हो सकते हैं। अभी SBI 7.50 lac से ऊपर student loan के लिए 11.15% p.a. और 7.50 lacs के लिए  10.85% p.a. interest rate चार्ज कर रहा है।

गोल्ड लोन

गोल्ड लोन, बैंक में गोल्ड रखने के बदले में कैश लेने की प्रक्रिया है। आपको गोल्ड बैंक के locker में रखना पड़ता है। इस प्रकार के लोन आपको जमा किए गए गोल्ड की quality और price पर मिलते हैं। व्यवहार में यह देखा गया है कि बैंक आपको गोल्ड की कीमत के 80% तक का लोन देता है। गोल्ड लोन प्रायः लोग emergency needs को पूरा करने के लिए ही लेते हैं। इस लोन पर लिया जाने वाला ब्याज दर पर्सनल लोन की तुलना में कम होता है। अभी SBI गोल्ड लोन पर 11.15% वार्षिक ब्याज दर वसूल रहा है।

कृषि लोन

किसान द्वारा अपने खेत को गिरवी रखकर या भारत सरकार द्वारा दिए गए किसान क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके अपनी अगली फसल (खेती) के लिए बीज और खाद वगेहरा की व्यवस्था करने के लिए लिया गया लोन, कृषि लोन की श्रेणी में आता है।

कॉर्पोरेट लोन (Corporate Loan)

बैंक जब बड़े खिलाड़ियों जैसे-विजय माल्या, अम्बानी भाइयों, टाटा, बिरला इत्यादि को लोन मुहैया कराता है, उसे कॉर्पोरेट लोन कहते हैं। अभी के नियम के अनुसार बैंक अपनी कोर कैपिटल का 55 प्रतिशत तक किसी एक बड़ी कंपनी को लोन दे सकता है। मगर हाल में हुए defaulter (वे लोग जो लोन नहीं चुका पाते) cases में बढ़ोतरी को देखते हुए RBI ने प्रस्ताव रखा है कि 1 जनवरी, 2019 तक ऐसा नियम लागू हो जायेगा जब बैंक कॉर्पोरेट ग्रुप को अपनी कोर कैपिटल का केवल 25% ही दे सकेगी जिससे जोखिम से बचा जा सके।

सिक्यूरिटी के बदले मिलने वाला लोन  (Loan against Securities)

बैंक आपके सिक्यूरिटी पेपर को रख कर लोन देता है। मगर सवाल उठता है सिक्यूरिटी पेपर क्या होता है? यदि आपने DEMAT share, mutual funds, insurance schemes, bonds में पहले से ही invest किया है तो यही आपके security papers हैं जिसके बदले में आपको बैंक लोन देगा। इन पेपर के वैल्यू होते हैं। आप यदि लोन चुकाने में असमर्थ हैं तो बैंक आपके सिक्यूरिटी पेपर को जब्त कर लेता है और बाज़ार में बेच देता है। आप इन सिक्यूरिटी पेपर को बैंक में गिरवी रख सकते हैं। बैंक आपको आपके इन पेपर के आधार पर overdraft की सुविधा देता है। Overdraft का अर्थ हुआ कि जितना आपके अकाउंट में पैसे हैं (even if zero rupee), उससे अधिक पैसे निकालने की सुविधा। आप अपने current account से अपनी जरूरत की राशि निकाल सकते हैं। सिक्यूरिटी पेपर और बांड के बारे में आप विस्तार में इस आर्टिकल में पढ़ सकते हैं।

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