घोटाले की अलमारी को ठिकाने लगाने की कोशिशें शुरू

भोपाल: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में हुए कथित घोटाले के सबूतों से भरी अलमारी को अब ठिकाने लगाने की कोशिशें शुरु हो गई है। करीब 13 साल पहले हुई इस घोटाले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस लंबे अरसे के दौरान अलमारी की न तो सील टूटी न दोषी को सजा मिली है। विवि परिसर में रखी इस अलमारी को 16 अप्रैल 2005 को ताला लगाकर सील किया गया था। सूत्रों की माने तो अलमारी के भीतर 2004 की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीईटी) की कॉपियां यानी ओएमआर शीट, पेपर से लेकर परीक्षा का रिकॉर्ड रखा गया है। प्रवेश परीक्षा और एडमिशन में घोटाला और गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच के ऐलान के साथ ये सबूत सील हुए थे। विश्वविद्यालय ने यूटीडी के कोर्स में एडमिशन के लिए सीईटी आयोजित की थी। इसका चेयरमैन प्रो. अनिलकुमार गर्ग को बनाया गया था।

परीक्षा नतीजे आने और प्रवेश सूची जारी होने के बाद हंगामा मचा। सामने आया कि परीक्षा में जवाब ओएमआर शीट पर लिए गए। कॉपी जांचने की बात आई तो ऑप्टिकल मार्क रीडर तकनीक यानी कम्प्यूटर से जंचने वाली इन कॉपियों को हाथ से ही जंचवा लिया गया। बाद में तथ्य सामने आए कि कॉपियां विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के बजाए सीईटी के तत्कालीन चेयरमैन और पेपर सेट करने वाले प्रो. गर्ग ने अपने ही विद्यार्थियों से जंचवा ली। मामले ने तूल पकड़ा और हल्ला मचा। इस बीच प्रवेश से वंचित रहा छात्र अंकित जैन हाई कोर्ट भी चला गया। उसे बाद में कोर्ट आदेश पर विश्वविद्यालय को एडमिशन भी देना पड़ा।

गड़बड़ी उजागर होने के बाद परीक्षा और मूल्यांकन पर जांच बैठा दी गई। परीक्षा का पूरा रिकॉर्ड ओएमआर शीट समेत चेयरमैन से कब्जे में लेकर अलमारी में सील कर दिया गया। इसके लिए उच्च सुरक्षा लॉकर वाली कंपनी की अलमारी खरीदी गई 13 साल पहले इसकी कीमत सवा लाख से ज्यादा थी। बाद में न तो जांच अंजाम पर पहुंची न ही सही-गलत या दोषियों का फैसला हुआ। मामले को विश्वविद्यालय ने ठंडा कर दिया। इस बीच तत्कालीन चेयरमैन और गड़बड़ी के आरोपित प्रो. गर्ग को 2017 से फिर से सीईटी की कमान सौंप दी गई। बीते साल सीईटी में फिर से परीक्षा से लेकर काउंसलिंग में तमाम गड़बड़ियां सामने आईं। कार्यपरिषद में मामला पहुंचा। विश्वविद्यालय ने खेद जताया और इस बार फिर से गुपचुप प्रो. गर्ग को चेयरमैन बना दिया। दो दिन पहले ही सत्र 2018 के लिए विश्वविद्यालय ने सीईटी 2018 का ऐलान किया है।

इस बीच 2004 की धांधली के रिकॉर्ड वाली यह अलमारी तक्षशिला कैंपस के आईआईपीएस के स्टोर में रखी है। हाल ही में कुछ लोग वहां पहुंचे और अलमारी की सील खोलकर दस्तावेज निकालने के लिए कहने लगे। दलील दी गई कि सीईटी कमेटी की ओर से उन्हें भेजा गया है। हालांकि लिखित आदेश न होने से कर्मचारियों ने उन्हें बैरंग लौटा दिया। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बिना निष्कर्ष ताजा परीक्षा के ठीक पहले पुरानी गड़बड़ी का रिकॉर्ड नष्ट करने की हड़बड़ी क्यों की जा रही है। यह समझ से परे हैं। 2004 में सीईटी गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी की कमान प्रो. पीएन मिश्रा को सौंपी गई। इस संबंध में , तत्कालीन जांच कमेटी प्रमुख प्रो. पीएन मिश्रा का कहना है कि मुझे फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की कमान सौंपी गई थी। हमने तथ्य जुटाकर विश्वविद्यालय को सौंप दिए थे। कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। कुलपति बदल गए, फिर आगे क्या हुआ, मैं नहीं जानता। कार्रवाई करना हमारा काम नहीं था।

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