चंद सालों में अरबपति बना एलडीए का बाबू, नौकरी छोड़ा, तो शुरू हो गयी जाँच

अश्वनी श्रीवास्तव


लखनऊ : चंद सालों में अरबपति बनना हो तो लखनऊ विकास प्राधिकरण की नौकरी हासिल कर लीजिये. अगर आपको नौकरी मिल गयी, फिर आपको मालामाल होने से कोई रोक नहीं सकता. दरअसल ऐसा ही एक प्रकरण अभी हाल ही में सामने आया है. प्राधिकरण में मृतक आश्रित कोटे में नवंबर 2003 में नौकरी पाए एक बाबू ने कुछ ही सालों में अपनी सारी हसरत पूरी कर ली और जब उसके घोटालों की जाँच शुरू हुई, तो उसमें फंसने के डर से उसने अपनी नौकरी से ही इस्तीफा दे दिया. लेकिन इससे उसके घोटालों पर और भी शक गहरा गया. अब प्राधिकरण के अफसर उसके इस्तीफे का कारण भी जानने की कोशिश में जुट गए हैं.

गौरतलब है कि प्राधिकरण के प्रापर्टी विभाग में तैनात लिपिक सुरेंद्र मोहन ने 20 दिसंबर 17 को लिपिक पद से इस्तीफा दे दिया. जिसके चलते उसके इस्तीफे की पत्रावली प्राधिकरण उपाध्यक्ष पीएन सिंह के पास स्वीकृति के लिए सचिव ने भेज दी. लेकिन प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने उसका इस्तीफा तो मंजूर करना दूर उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस पर जाँच करने के आदेश जरूर पारित कर दिए. अब इस पूरे मामले की जाँच प्राधिकरण के अधिष्ठान विभाग में तैनात संयुक्त सचिव महेंद्र कुमार मिश्रा कर रहे हैं. इस बाबत उनका कहना है कि चंद सालों में कोई बाबू इतनी अधिक प्रापर्टी जमा कर ले. यह बड़े आश्चर्य की बात है. फिलहाल उनका कहना है कि जल्दी ही जाँच पूरी कर सुरेंद्र की पत्रावली प्राधिकरण उपाध्यक्ष के पास निर्णय के लिए भेज दी जाएगी.

तीन सौ से अधिक भूखंडों का समायोजन

सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण की गोमती नगर योजना के विस्तार में इस बाबू ने प्रापर्टी विभाग में अपनी तैनाती कराकर तक़रीबन 300 भूखंडों का समायोजन किया. इस दौरान उसने अपने नाते रिश्तेदारों के नाम से दो दर्जन से अधिक प्रापर्टी बना ली. गौरतलब है कि मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पाने वाले प्राधिकरण के प्रापर्टी विभाग में तैनात सुरेंद्र मोहन के पिता प्राधिकरण में माली के पद पर तैनात थे. बावजूद इसके उसको लिपिक पद पर कैसे नौकरी मिल गयी. इसकी भी जाँच उसके इस्तीफा देने के बाद शुरू हो गयी है. बताया जाता है कि पिछली सपा सरकार में तो इस बाबू के आगे बड़े-बड़े कई दिग्गज नेता तक आगे-पीछे घूमते थे. इसकी खास वजह यह है कि मुलायम सिंह यादव कि दूसरी पत्नी साधना के बेटे प्रतीक यादव की सासू माँ अंबी विष्ट के इस बाबू से नजदीकी संबंध थे.

बीएम डब्लू जैसी गाड़ियों का शौकीन

जिसके चलते सुरेंद्र मोहन ने उनके जरिये ही प्रापर्टी की मलाईदार योजना में अपनी पोस्टिंग पहले कराई और बाद में दोनों ने मिलकर प्राधिकरण के कई भूखंडों और मकानों को दलालों के हाथ मोटी-मोटी रकम लेकर उनका आवंटन किया. नतीजतन सरकार का सुरेंद्र मोहन के ऊपर हाथ होने से उसके हौसले और भी बुलंद हो गए. इसी का नतीजा है कि सुरेंद्र ने प्राधिकरण में अपनी तैनाती के दौरान जमकर घोटालों को अंजाम दिया और जमकर दलालों के जरिये आवंटन कर माल कमाया. फिलहाल प्राधिकरण के विराज खंड एक और दो में तो उसके कई भूखंड हैं ही. साथ ही विराट खंड मार्केट में उसकी दो दुकाने भी हैं, इसके अलावा ऊपर की सारी छत का मालिक भी वही है.

इसके अलावा गोमती नगर विस्तार में भी इस बाबू के कई भूखंड बताये जा रहे हैं. बहरहाल जाँच के घेरे में आये इस बाबू के इस्तीफा देने के बाद से उस पर घोटाला करने का शक और भी गहरा गया है.और तो और प्राधिकरण के इस बाबू के पास कई लग्जरी गाड़ियां भी आज की तारीख में मौजूद हैं. बताया जाता है कि बीएम डब्लू, आई-10 और टाटा सफारी जैसी कई बड़ी गाड़ियों के मालिक बने सुरेंद्र मोहन के कारनामों का काला चिट्ठा अब जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

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