चमकी बुखार से पहले बच्चों में दिखाई देते हैं ये लक्षण, नजरअंदाज करने पर हुआ भारी नुकसान

लखनऊ: बिहार के मुजफ्फरपुर में इन दिनों जो हालात हैं उनका दर्द सिर्फ वहीं परिवार जान सकते हैं, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने कालेजे के टूकड़े को दम तोड़ते देखा है. गांव में चमकी बुखार ऐसी आफत बनकर आया जिसने एक-एक करके सैकड़ों बच्चों की जानें लील लीं. अब हालात ऐसे हैं कि आसपास के लोग भी बुखार सुनते ही दहशत में हैं.

सैकड़ों बच्चों की जान जाने पर पूरा गांव आंसू बहा रहा है तो वहीं डॉक्टर इस बुखार की जड़ तक जा रहे हैं कि ऐसा कैसा बुखार है जिसका इलाज सफल नहीं हो पा रहा है, हालांकि कई बच्चों की मौत के बाद बाहर के डॉक्टरों की टीम बुलाई गई और बुखार की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है. देखिये क्या है ये चमकी बुखार…

चमकी बुखार को डॉक्टरी भाषा में एक्यूट इंसेफलाइटिस के नाम से जाना जाता है तो वहीं आम भाषा में इसे जापानी या दिमागी बुखार के नाम से जाना जाता है. चमकी बुखार ज्यादा गर्मी और उमस के चलते 1 साल के बच्चे से लेकर 10 साल के बच्चे को हो रहा है. गौर करने वाली बात ये है कि आखिर ये बुखार बच्चों को ही क्यों हो रहा है.

डॉक्टरों के मुताबिक ये बुखार तो किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन जिन बच्चों का मानसिक रूप से विकास नहीं हो पाया है वो बच्चे इन बुखार की चपेट में आ रहे हैं. बिहार में जिन बच्चों का बुखार हुआ है वो ज्यादातर कुपोषण के शिकार बच्चे हैं. इन बच्चों को ये बुखार जल्दी चपेट में लेता है.

चमकी बुखार या इंसेफलाइटिस मस्तिष्क से संबंधी समस्या है। मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं होती हैं, जिसके सहारे पूरी बॉडी काम करती है। ऐसी स्थिति में अगर इन कोशिकाओं में सूजन आ जाती है, तो इसे इंसेफलाइटिस कहते हैं। इस बीमारी के जब वायरस शरीर में प्रवेश कहते हैं, तो खून के सहारे मस्तिष्क में पहुंच जाते हैं, जिससे वहां सूजन हो जाती है और परिणामस्वरुप शरीर का ‘सेंट्रल नर्वस सिस्टम’ खराब हो जाता है, जिसे चमकी बुखार कहा जाता है.

इस बुखार में बच्चो के सिर में दर्द पैदा होने लगता है. कमजोरी आने लगती है और कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं होता है. कभी-कभी बच्चे कमजोरी की वजह से बेहोश भी होने लगते हैं और उल्टी भी आने लगती है अगर ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि ज्यादा देर हो जाने पर बच्चे को बचाना मुश्किल हो सकता है.

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