चाणक्य ने धन को लेकर बताई हैं ये महत्वपूर्ण बातें, हर व्यक्ति को जरूर जानना चाहिए

नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतिशास्त्र में ऐसी बहुत सी बातें बताई है जिन पर अगर व्यक्ति अमल करता है तो वह अपना जीवन खुशहाल व्यतीत कर सकता है। आपको बता दें कि आचार्य चाणक्य अपने समय के एक विद्वान व्यक्ति थे जिनकी नीतियां काफी मशहूर हैं। वर्तमान समय में भी आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई बातें हर किसी मनुष्य के जीवन में लागू होती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतिशास्त्र में इस बात का उल्लेख किया है कि धन ही सब कुछ नहीं होता लेकिन धन से ही सब कुछ पाया जा सकता है।

ऐसा कहा जाता है कि धन से मनुष्य के जीवन की लगभग 70% समस्याएं खुद ही समाप्त हो जाती हैं। यह बात अलग है कि धन के बल पर लोग अपने जीवन में खुद ही समस्याएं खड़ी करने लगते हैं। इंसान के जीवन में धन का बहुत महत्व होता है। आज हम आपको आचार्य चाणक्य ने धन के संबंध में क्या कहा है, इसके बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

धन से सम्मान की होती है प्राप्ति

आचार्य चाणक्य अनुसार जीवन में धन संपत्ति को महत्वपूर्ण भाग बताया गया है। धन से मनुष्य को सम्मान की प्राप्ति होती है इतना ही नहीं बल्कि विपरीत परिस्थितियों में सामना करने में व्यक्ति समर्थ भी बनता है।

धन की बचत करनी चाहिए

आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतिशास्त्र में इस बात का उल्लेख किया है कि हर व्यक्ति को अपने बुरे दिनों के लिए धन की बचत करना बहुत ही जरूरी है इसके अलावा चाणक्य ने यह बताया है कि महिला की रक्षा हर हालत में करनी चाहिए भले ही उसके लिए बचत के पैसे भी खर्च करना पड़ जाए।

धन का मोह नहीं करना चाहिए

आचार्य चाणक्य अनुसार जो धन बहुत मेहनत के बाद प्राप्त हो, जिसके लिए अपने धर्म का त्याग करना पड़ जाए, जिसके लिए शत्रुओं की खुशामद करनी पड़े, इस प्रकार के धन का मोह भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

धन से परीक्षा

आचार्य चाणक्य के अनुसार अपनी पत्नी की परीक्षा धन-संपत्ति खोने के पश्चात करना चाहिए। दोस्त की परीक्षा जरूरत के समय करनी चाहिए और नौकरी को महत्वपूर्ण कार्य देने के बाद परखना चाहिए। आचार्य चाणक्य का कहना है कि सच्चा पुत्र अपने पिता के प्रति आज्ञाकारी होता है और सच्चा पिता अपने बच्चे का ध्यान रखता है। ईमानदारी ही सच्चे दोस्त की सही पहचान होती है।

गरीबी एक रोग के समान है

चाणक्य का ऐसा कहना है कि गरीब और गरीबी के साथ जीवन व्यतीत करना जहर के समान होता है। अनजान जगह पर दक्षता सबसे बड़ी मित्र होती है। अच्छे स्वभाव की महिला सच में पुरुष की सबसे अच्छी दोस्त मानी जाती है। बीमारी की दोस्त दवाई है और दान पुण्य अगले जन्म में काम आता है।

दान हमेशा सीमा में रहकर करें

आचार्य चाणक्य ने यह बताया है कि व्यक्ति को हमेशा दान सीमा में रहकर करना चाहिए। अत्यधिक दान से नुकसान होता है। जिस प्रकार अत्यधिक सुंदरता के कारण सीता का अपहरण हुआ, अत्यधिक घमंड की वजह से रावण मारा गया और अत्यधिक दानवीरता की वजह से बाली को बहुत कष्ट हुआ था।

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