चित्रकूट से अपहृत जुड़वां भाइयों के शव यमुना में मिले

बांदा/चित्रकूट: बीती 12 फरवरी को दिनदहाड़े चित्रकूट के सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट द्वारा संचालित सद्गुरु पब्लिक स्कूल से अपहृत दो जुड़वा भाइयों के शव बांदा के मरका थाना के बाकल गांव से सटकर बह रही यमुना नदी से पुलिस ने बरामद किये। राजकीय मेडिकल कालेज में कड़ी सुरक्षा के बीच दो चिकित्सकों के पैनल ने शवों का पोस्टमार्टम किया। करीब पांच घंटे की इस प्रक्रिया में एसपी और विभिन्न राजनैतिक दलों के लोग मौजूद रहे। पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिजनों को सौंपने के बाद चित्रकूट रवाना किया गया। वहीं, दोनों बच्चों के शव चित्रकूट पहुंचने पर आक्रोशित लोगों ने जमकर तोड़फोड़ व आगजनी की। जनपद चित्रकूट निवासी तेल व्यवसायी बृजेश रावत के छह वर्षीय जुड़वा पुत्र प्रियांश व श्रेयांश चित्रकूट के सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट द्वारा संचालित सद्गुरु पब्लिक स्कूल में यूकेजी में पढ़ते थे। गत 12 फरवरी को स्कूल बस से वापस लौटते स्कूल कैंपस के अंदर ही बस रोककर कट्टे की नोक पर दो नकाबपोश बदमाशों ने दोनों जुड़वा भाइयों का अपहरण कर लिया था।

जुड़वा भाइयों के अपहरण हो जाने के बाद यूपी और एमपी के आला पुलिस अधिकारी दोनों को सकुशल बरामद करने के लिए हाथ-पैर मार रहे थे। लगातार पुलिस की टीमें सीसीटीवी फुटेज और अन्य माध्यमों से अपहर्ताओं का पता लगाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। आठ दिन गुजरने पर गत 19 फरवरी को मोबाइल के जरिए अपहर्ताओं ने 20 लाख रुपये फिरौती की मांग की। पिता बृजेश रावत ने 20 लाख रुपये की रकम अपहर्ताओं को चौसड़ गांव में एक बैग में दी। बैग को पुलिया पर रखवा दिया गया था। इसके पूर्व अपहृत दोनों बच्चों से पिता की बात कराई गई थी। इसके बाद अपहर्ताओं ने दोनों बच्चों को छोड़ने के एवज में एक करोड़ रपए की मांग की। पिता बृजेश फिरौती देने को तैयार थे, लेकिन अपहर्ताओं के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। अपहर्ताओं ने दोनों बच्चों की हत्या करने के बाद रस्सी से पहले हाथ पैर बांधे, फिर उन्हें मच्छरदानी में लपेट दिया। इसके बाद जंजीर में शव और पत्थर बांधकर मरका थाना क्षेत्र के बाकल गांव से सटकर बह रही यमुना नदी में फेंक दिया। इसके बाद अपहर्ता अतर्रा पहुंचे और वहां पर एक चाट की दुकान में चाट खाई। वहीं पर खड़े एक व्यक्ति के मोबाइल से फिरौती की मांग की।

उस व्यक्ति को शक हुआ तो उसने अपहर्ताओं के बाइक के नंबर प्लेट की फोटो खींच ली और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने बाइक नंबर को ट्रेस किया तो मामला परत-दर-परत खुलने लगा। पुलिस ने पहले आरोपी रोहित द्विवेदी पिता ब्रम्हदत्त द्विवेदी को पकड़ा। इसके बाद राजू द्विवेदी पुत्र राकेश द्विवेदी निवासी भभुवा बबेरू को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों पदम शुक्ला पुत्र रामकरण शुक्ला निवासी जानकीकुंड और लक्की सिंह तोमर के साथ मिलकर दोनों बच्चों के अपहरण की घटना को अंजाम दिया था। आरोपियों ने बताया कि बच्चों द्वारा पहचान लेने के डर से उनकी हत्या करने के बाद शव यमुना नदी में फेंक दिए गए। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने मल्लाहों को बुलवाकर यमुना नदी में जाल डलवाया और रविवार सुबह दोनों मासूम बच्चों के शव बरामद किए। एक शव का पैर जल जंतुओं ने कुतर डाला था।

दोनों जुड़वा बेटों के शव बरामद होने की खबर पाकर पिता बृजेश रावत नयागांव मप्र से कांग्रेस विधायक नीलांशु चतुव्रेदी के साथ मौके पर पहुंचे और बच्चों के शव देखकर बदहवास हो गए। पुलिस ने दोनों शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जहां पर करीब पांच घंटे की प्रक्रिया के बाद पोस्टमार्टम दो चिकित्सकों डॉ. पवन पटेल, डॉ. देव तिवारी ने किया। पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान राजकीय मेडिकल कालेज प्राचार्य मुकेश यादव और डॉ. नवीन चक के अलावा पुलिस अधीक्षक गणोश साहा मौजूद रहे। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उन्हें जैसे ही बच्चों की हत्या कर शव नदी में फेंके जाने की जानकारी हुई तो रात में ही नदी में जाल डलवाकर बच्चों के शव बरामद किए गए।

उधर, दोनों बच्चों के शव चित्रकूट पहुंचने पर आक्रेाशित लोगों ने सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के बाहर जमकर प्र्दशन कर शापिंग काम्पलैक्स में तोड़फोड़ व आगजनी की। मौके पर पहुंचे सतना डीएम सत्येन्द्र कुमार सिंह, आईजी चंचल शेखर, डीआईजी अविनाश शर्मा व एसपी सतना संतोश सिंह गौर ने स्थिति को संभाला। इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर पत्थरबाजी भी हुई, जिसमें पुलिस ने आंसूगैस व लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। धर्म नगरी में धारा 144 लागू करते हुये चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात कर दी गयी है। मध्य प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सभी बाजार घटना के विरोध में बंद रहे। दोनों मासूम बच्चों का मंदाकिनी किनारे श्मशान गृह में हजारों की भीड़ के बीच अंतिम संस्कार किया गया।

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