चीन की तनाव कम करने के लिए शर्त, दोनों सेनाएं बराबरी से पीछे जाएं, भारत ने कहा- नामुमकिन

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच इस वक्त तनाव की स्थिति बनी हुई है। चीन लगातार उकसावे वाली हरकतें कर रहा है। भारत भी उसको माकूल जवाब दे रहा है जिससे चीन और भी ज्यादा खार खाया बैठा है। दोनों ही देशों के बीच कई दौर की सैन्य वार्ता और कूटनीतिक बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकला है। अब चीन का कहना है कि भारत फिंगर-4 से पीछे लौटे और उतना ही फिर हम पीछे जाएंगे।

आसाना भाषा में समझिए चीन की साजिश
आसाना भाषा में इसका मतलब तो यह हुआ कि चीन फिंगर 4 से फिंगर 8 पर चला जाए (जो भारत की मांग भी है) लेकिन भारत भी फिंगर 1 से पीछे चला जाए, जबकि भारत फिंगर 8 तक पट्रोलिंग करता रहा है…यानी इस सूरत में भारत फिंगर 1 तक ही सीमित कर रह जाएगा। चीन का मतलब साफ है कि भारत को उसी की सीमा से पीछे ढकेल दिया जाए और चीन जो हमारी पेट्रोलिंग एरिया में घुसा है वो उससे पीछे जाए। फिलहाल भारत ने सिरे से इस मांग को खारिज कर दिया है।

सूत्रों से जानकारी हुई है कि चीन भारत को उसी की सीमा में पीछे जाने के लिए कह रहा है। सूत्रों के मुताबिक, “चीनी पक्ष ने एक सुझाव दिया था कि भारत और चीन दोनों को फिंगर -4 क्षेत्र से समान रूप से वापस जाना चाहिए। यह सुझाव भारतीय पक्ष को स्वीकार्य नहीं है”।

फिलहाल चीनी सेना पैंगोंग त्सो झील के पास फिंगर 5 के आसपास हैं और उन्होंने फिंगर 5 से फिंगर 8 तक पांच किलोमीटर से अधिक की दूरी पर बड़ी संख्या में सैनिकों और उपकरणों को तैनात किया है जिसके आगे अप्रैल-मई से पहले चीनी बेस मौजूद हैं। भारतीय पक्ष हमेशा से ही चीन से कहता रहा है कि चीनी सेना को फिंगर क्षेत्र से पूरी तरह से वापस अपने मूल स्थान पर जाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि चीनी पक्ष के सुझाव को स्वीकार करना नामुमिकन था।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper