चीन को आर्थिक मोर्चे पर जोर का झटका देने की तैयारी

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में चीन की नापाक हरकत का जवाब देने के लिए सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है। इसके तहत चीन से होने वाले व्यापार, निवेश और प्रोजेक्ट सर्विसेस पर लगाम लगाने की तैयारी की जा रही है। सरकारी ठेकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की परियोनाओं में चीन की कंपनियों के भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। चीन से आने वाले तैयार माल पर भारी टैक्स लगाया जा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की भी समीक्षा की जा सकती है जिनका इस्तेमाल करके चीन अप्रत्यक्ष रूप से अपना माल भारत में भेज रहा है।

सरकारी अधिकारियों ने ईटी के बताया कि इस बारे में विस्तार से चर्चा के लिए जल्दी ही एक हाई लेवल मीटिंग हो सकती है। इसमें सभी संबंधित विभागों के मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के शीर्ष अधिकारी हिस्सा ले सकते हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। इसके दोनों पहलुओं पर विचार किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि ये उपाय कब और कैसे किए जाने हैं। साथ ही भारतीय कंपनियों पर इनके प्रभाव पर भी विचार करना होगा।

चीन से आयात कम करने के उपाय
चीन से आयात कम करने के लिए भारत के पास कई विकल्प हैं। इसके लिए चीन से आने वाले सामान पर हाई टैरिफ लगाया जा सकता है। साथ ही कई नॉन-टैरिफ उपाय भी हैं। वित्त वर्ष 2019 में भारत ने चीन से 70 अरब डॉलर का आयात किया था। इस दौरान भारत का व्यापार घाटा 53 अरब डॉलर का था। इस घाटे को अब करने के लिए किए जा रहे प्रयासों में अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। भारत के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में चीन की कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है।

चीनी सामान से आयात को हतोत्साहित करने के साथ ही सरकार ये सामान बनाने वाली घरेलू कंपनियों को भी प्रोत्साहन देगी। साथ ही भारत विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की भी समीक्षा करेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि भारतीय बाजार तक पहुंचने के लिए चीन इनका इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है। भारत ने पहले ही रीजनल कंप्रहैंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) वार्ता से किनारा कर लिया था। इसमें चीन और अन्य देश शामिल हैं। भारत का कहना था कि इस समझौते में चीन से आयात बढ़ने से रोकने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। चीन से आयात को हतोत्साहित करने के लिए सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड और नियम लागू किए जा सकते हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के ठेके
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक चीन के कंपनियों को इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के ठेकों में हिस्सा लेने से रोका जा सकता है। इसके लिए परस्परता के सिद्धांत पर आधारित एक प्रावधान किया जा सकता है। इसके तहत सरकार ऐसे देशों की कंपनियों की हिस्सेदारी प्रतिबंधित कर सकती है जहां भारतीय कंपनियों को कड़े प्रावधानों का सामना करना पड़ता है।

इसके लिए लॉ मिनिस्ट्री विभिन्न विकल्पों पर माथापच्ची कर रही है ताकि इसे किसी तरह की चुनौती न दी जा सके। अधिकारी ने कहा कि इसमें सभी देशों को शामिल किया जा सकता है लेकिन इसके मुख्य निशाना चीन की कंपनियां हैं। अधिकारियों के मुताबिक सबसे पहले रोड और हाइवे सेक्टर में यह प्रावधान किया जा सकता है और फिर इसे दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ाया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि इसे अंतिम रूप देने के लिए रोड एंड हाइवे मिनिस्ट्री और लॉ मिनिस्ट्री के बीच चर्चा चल रही है।

सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर चीन की कंपनियों को दूर रखने के लिए सरकार ने पहले ही बीएसएनएल और एमटीएनएल के ठेकों को रद्द कर दिया है और इन पर नए सिरे से काम किया जा रहा है। सरकार और पीएसयू के ठेकों को भारतीय कंपनियों को देने के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए जा सकते हैं। लॉ मिनिस्ट्री दूसरे देशों के नियमों के मुताबिक इस प्रावधान की व्यावहारिकता पर विचार कर रही है। अधिकारी ने कहा कि इन सख्त शर्तों का मकसद घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देना है।

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