चीन ने पनडुब्बियों की मदद के लिए हिंद महासागर में बिछाया जाल

नई दिल्ली: अपनी पनडुब्बियों की मदद के लिए चीन ने पानी के भीतर एक नया निगरानी तंत्र विकसित किया है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसके जरिए हिंद महासागर सहित समुद्री सिल्क मार्ग पर राष्ट्रीय हितों की हिफाजत की जाएगी। मालूम हो कि हिंद महासागर व दक्षिण चीन सागर में इस समय भारत का ‘दबदबा’ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस तंत्र की शुरूआत पहले ही हो चुकी है। इसके जरिए पानी के भीतर की स्थिति खासकर पानी के तापमान और खारापन के बारे में सूचनाएं इकट्ठा की जाती है। इन सूचनाओं का इस्तेमाल नौसेना लक्षित पोत का सटीक पता लगाने के साथ ही नौवहन प्रणाली तथा स्थिति को और बेहतर करने में कर सकती है। चीनी विज्ञान अकादमी (सीएएस) के अंतर्गत दक्षिण चीन सागर समुद्री विज्ञान संस्थान के नेतृत्व वाली परियोजना अभूतपूर्व सैन्य विस्तार का हिस्सा है जिसके जरिए बीजिंग समुद्र में अमेरिका को चुनौती देने की आकांक्षा रखता है।

समुद्र विज्ञान संस्थान ने नवंबर में बताया था कि कई साल तक निर्माण और परीक्षण के बाद ”अच्छे नतीजे देने वाली नयी निगरानी प्रणाली अब नौसेना के हाथ में है। इसमें कहा गया है कि इस प्रणाली के बावजूद चीन को वास्तविक महाशक्ति से मुकाबला करने के लिए काफी कुछ करने की जरूरत है। चीन की यह प्रणाली प्लेटफार्म के नेटवर्क, पोत, उपग्रह और पानी के भीतर स्थित ग्लाइडर्स पर आधारित है और इसके जरिए दक्षिण चीन सागर और पश्चिम प्रशांत और हिंद महसागर से आंकड़े जुटाए जाते हैं।

बीजिंग ऊर्जा के मामले में समृद्ध दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से पर अपना दावा ठोकता है, जिससे होकर 5,000 अरब डॉलर का सालाना व्यापार होता है। इसके दावे का विरोध ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान, फिलीपींस और वियतनाम की ओर से किया जा रहा है।

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