चीन से आता है जवानों के बुलेट प्रूफ जैकेट का कच्चा माल, नीति आयोग के सदस्य ने किया विरोध

नई दिल्ली: देश के वीर जवानों के लिए इस्तेमाल होने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने के लिए जरूरी सामान या कच्चा माल भी चीन से आयात किया जाता है. इसको लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं. नीति आयोग के एक सदस्य वी.के. सारस्वत ने इसका विरोध करते हुए कहा कि चीन से इस आयात पर रोक लगनी चाहिए.

नीति आयोग के सदस्य सारस्वत ने कहा कि चीन से बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने का जो सामान आता है, उसकी ‘गुणवत्ता लगातार एकसमान नहीं रहती.’ सारस्वत ने कहा, ‘हमारी समिति ने बहुत साफ सिफारिश की थी कि हमें जितनी जल्दी संभव हो स्वदेशी सामान का इस्तेमाल करना चाहिए और जहां स्वदेशी सामान न हो, आयात जरूरी है, वहां चीन से आयात से हमें बचना चाहिए क्योंकि उनकी गुणवत्ता लगातार एक जैसी नहीं रहती.’

गौरतलब है कि सीमा पर चीनी सेना के साथ हिंसक झड़प में हमारे देश के 20 जवान शहीद हो गए हैं. ऐसे में देश में चीन विरोधी राष्ट्रवाद चरम पर है. चीनी सामान के बहिष्कार और चीन से आने वाले आयात को कम करने की बात हो रही है. ऐसे में लोगों को यह जानकर हैरत हुई है कि हमारे जवानों के लिए भारतीय कंपनियां जो बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार करती हैं, उसके लिए कच्चा माल या जरूरी सामान भी चीन से आयात होता है.

सारस्वत, डिफेंस रिसर्च एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख भी रह चुके हैं. सारस्वत ने कहा कि हमारे सैनिकों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार करने वाली कंपनियों को इसके लिए कच्चा माल अन्य देशों से मंगाना चाहिए.

डिफेंस में भी आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए मोदी सरकार लगातार प्रयास कर रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने नीति आयोग से कहा है कि लाइटवेट बॉडी आरमर्स और प्रोटेक्टिव गियर्स के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को ‘प्रोत्साहित’ किया जाए. ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड भी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बॉडी आरमर के लिए क्वालिटी नॉर्म्स को अंतिम रूप दे रहा है.

एक अनुमान के अनुसार भारतीय सशस्त्र बलों को करीब 3 लाख बुलेट प्रूफ जैकेट की जरूरत है. सस्ती कीमत की वजह से बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने वाली कंपनियां अब चीन से कच्चा माल मंगाने लगी हैं. पहले इसे यूरोप और अमेरिका से मंगाया जाता था. कानुपर की कंपनी एमकेयू और टाटा एडवांस्ड मैटेरियल कई देशों की सेनाओं को बॉडी आरमर की आपूर्ति करती हैं.

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