चुनावी बॉन्ड पर तकरार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से माँगा जबाब

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: जिस चुनावी बॉन्ड का ऐलान कर पिछले साल मोदी सरकार जनता के बीच वाहवाही लूट रही थी ,अब सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने चुनावी बॉन्ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दिया है जिस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से जबाब माँगा है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यामूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने येचुरी की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पहले से लंबित मामले के साथ इसे अटैच कर दिया है।

गौरतलब है कि केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली सीपीएम नेता की याचिका में कहा गया कि यह कदम लोकतंत्र को कमतर आंकने वाला है। याचिका में कहा गया कि इस फैसले से राजनीतिक भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी होगी। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि उन्होंने यह मामला संसद में भी उठाया था। उन्होंने इसमें संशोधन का अनुरोध भी किया था, लेकिन लोकसभा में बहुमत के सहारे सरकार ने राज्यसभा की सिफारिशों को अस्वीकार कर दिया था। येचुरी ने कहा कि संसद में मामले को उठाने के बाद भी जब कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के आलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

उल्लेखनीय है कि एनडीए सरकार ने पिछले बजट में चुनावी बांड की घोषणा की थी। एनडीए सरकार ने अपने पिछले बजट में कहा था कि बॉन्ड योजना के जरिए भारत में रानीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता आएगी। सरकार के इस ऐलान का जनता ने भी समर्थन किया था और कहा था कि मोदी सरकार चुनावी भ्रष्टाचार को ख़त्म करना चाहती है। यह बात और है कि तब भी विपक्ष ने इस योजना पर चिंता जाहिर की थी। विपक्ष का मांग है कि चुनावी बॉन्ड की जगह सरकार चुनाव आयोग की तरह एक संस्था का निर्माण करे जिससे कि कॉर्पोरेट उसे फंड दे सके और यह चुनाव आयोग की देखरेख में रहे। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर क्या आदेश देता है। यह बात और है कि चुनावी भ्रष्टाचार हमारे देश में सबसे बड़ा है और तमाम तरह के उपाय के बाद भी इस चुनावी भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं हो रहे हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper