चुनावी महाभारत से पहले असमंजस में कर्नाटक कांग्रेस का कमांडर

इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री सिद्धरामैया कर्नाटक के चुनावी महाभारत में कांग्रेस के सबसे बड़े कमांडर हैं, लेकिन चुनावी महाभारत से पहले कमांडर ही असमंजस में है। टिकट की घोषणा हो चुकी है। नमांकन प्रक्रिया भी शुरू है, लेकिन चामुंडेश्वरी सीट ने सीएम की चिंता बढ़ा दी है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि चुनाव एक सीट से लड़ें या दो सीट से। सिद्धरामैया का यह असमंजस कांग्रेस नेतृत्व को परेशान कर रहा है। पार्टी को डर है कि मुख्यमंत्री का असमंजस कहीं पूरे प्रदेश में पार्टी के चुनावी माहौल को खराब न कर दे।

सर्वे के मुताबिक, सिद्धरामैया सिर्फ चामुंडेश्वरी से लड़ते हैं तो हार का खतरा है। वहीं टिकट की घोषणा हो जाने के बाद फिर से उन्हें दो सीटों से लड़ाने का फैसला होता है तो भाजपा इसे राज्यभर में कांग्रेस के खराब हालत के रूप में प्रचारित करेगी। कांग्रेस के कंफिडेंस पर सवाल खड़ा होगा। पार्टी के अंदर भी कलह बढ़ेगी। कर्नाटक में कांग्रेस की पूरी चुनावी रणनीति सिद्धरामैया के इर्दगीर्द घुमती नजर आती है। कहा जा सकता है कि पार्टी के चुनावी प्रबंधन में राहुल गांधी पीछे और सिद्धरामैया आगे हैं। मतलब साफ है कि कांग्रेस को कर्नाटक में सत्ता की वापसी का पूरा दरोमदार पार्टी के मुख्य कमांडर सिद्धरामैया पर ही निर्भर है, लेकिन चामुंडेश्वरी में पार्टी के अंदरूनी सर्वे और खुफिया रिपोर्ट के कारण सिद्धरामैया के लिए सिर्फ एक जगह से चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटाना कठिन हो रहा है।

बेटे को राजनीति में लांच कराने के लिए परेशान सिद्धरामैया ने अपनी सुरक्षीत सीट वरुणा बेटे यथिन्द्र के लिए छोड़ दिया। खुद चुमंडेश्वरी से उम्मीदवार बन गये, लेकिन सर्वे और खुफिया रिर्पोट में हार की भविष्यवाणी के कारण मुख्यमंत्री को पसीने छूटने लगे हैं। अब एक बार फिर से उनके दो सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गयी है। यदि ऐसा होता है तो जिसे टिकट मिल चुका है उसे हटाकर सिद्धरामैया को लड़ना पडेगा। इससे पार्टी में एक नया झमेला खड़ा होगा।

बता दें कि बगलकोट जिले की बदामी सीट से मौजूदा विधायक बीबी चिम्मनकट्टी ने मुख्यमंत्री सिद्धरामैया के लिए बदामी सीट छोड़ने का ऐलान किया था, लेकिन सिद्धरामैया को सिर्फ एक जगह से लड़ने की अनुमति मिली। साथ ही चिम्मनकटटी का टिकट काटकर डा0 देवराज पाटिल को टिकट थमा दिया गया। इससे अब चिम्मनकटटी समर्थकों में भारी आक्रोश है। वे पार्टी के लिए बदामी में मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। बदामी से टिकट पा चुके डा0 देवराज पाटिल को अभी तक बी फार्म नहीं दिया गया है।

इधर मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने कहा है कि वे सिर्फ चामुंडेशरी से चुनाव लड़ेंगे। यह पूछे जाने पर कि पार्टी उन्हें बदामी से भी टिकट देती है तो? इस को सवाल को सिद्धरामैया ने यह कहकर टाल दिया कि अभी जवाब देना उचित नहीं है। उधर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी वेणुगोपाल भी परेशान हैं। वे इस समस्या को लेकर लगातार केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में हैं। इस तरह चुनावी महाभारत से पहले सुप्रीम कमांडर का असमंजस कांग्रेस के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है। यह पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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