चुनावी मुहाने पर खड़ी दिल्ली

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: तो क्या मान लिया जाय कि बड़े दलों के दलदल में फसी आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार अब गिरने वाली ही है और दिल्ली चुनाव के मुहाने पर खड़ी है ? जिस तरह से चुनाव आयोग ने लाभ पद के मामले में उसके 20 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की सिफारिश राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से की है और कोविंद इस सिफारिश को मान लेते हैं तो दिल्ली से 20 सदस्यों की सदस्यता चली जाएगी।

जाहिर है आप के भीतर जिस तरह की राजनीती चल रही है और बहुत सारे विधायक नेता अरविन्द केजरीवाल पर हमला करते जा रहे हैं उससे लगता है कि इस सरकार का बचे रहना मुश्किल है। एक कारण और भी है। बीजेपी तो कतई नहीं चाहती दिल्ली में आप की सरकार और उधर कांग्रेस वाले भला दाल भात में मुसनचन्द को क्यों पसंद करे।

ऐसे में 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में आप पार्टी के विधायकों की संख्या 66 से घटकर सीधे 46 पर आ जाएगी। विधायक कपिल शर्मा बागी हो चुके हैं। जबकि कुमार विश्वास राज्यसभा में नहीं भेजे जाने से नाराज हैं और बताया जाता है कि उनके पास करीब 10 विधायकों का समर्थन हैं और मौका देखते हुए वह पाला बदल सकते हैं। ऐसा होने पर केजरीवाल सरकार पर संकट बरकरार रहेगा।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के 4 विधायक हैं। 7 फरवरी, 2015 को विधानसभा चुनाव कराए गए थे जिसमें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। हालांकि आप पार्टी ने चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया है. आने वाले समय में दिल्ली का राजनीतिक घटनाक्रम बेहद रोमांचक होने वाला है, देखना होगा कि यहां की राजनीति किस तरफ रूख करती है।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति अगर इस सिफारिश को मान लेते हैं तो 20 सदस्यों की सदस्यता चली जाएगी, ऐसी स्थिति में दिल्ली में फिर से चुनाव का माहौल बनेगा। इन सीटों पर चुनाव होने की स्थिति में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के पास दिल्ली विधानसभा में अपनी स्थिति बेहतर करने का मौका मिल सकता है।

लेकिन इसमें एक और पेंच है। नया एंगिल। 22 जनवरी को रिटायर होने से पहले अपने आखिरी कार्य दिवस पर मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति ने 20 सदस्यों की सदस्यता खारिज किए जाने की सिफारिश की है। आप के नेता इसे खेल बता रहे हैं। भारद्वाज ने कहा है कि ज्योति ने मोदी के कर्ज का चुकता किया है। चलिए कुछ भी हो सकता है। आप पार्टी इसे फैसले को कोर्ट में ले जाएगी, जबकि भाजपा और कांग्रेस चाहेगी कि राष्ट्रपति इस पर जल्द फैसला लें और सारी स्थिति पूरी तरह से साफ हो जाए।

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