चुनावी राजनीति में हज सब्सिडी का चौसर

अखिलेश अखिल


लखनऊ ट्रिब्यून (दिल्ली ब्यूरो): केंद्र सरकार ने हज सब्सिडी को ख़त्म कर कई राज्यों को मुसीबत में दाल दिया है। केंद्र ने अब गेम उन राज्यों के पाले में डाल दी है जहां मुस्लिम आबादी राजनीति को प्रभावित करने की स्थिती मे है। 2011 के जनगणना आंकड़ों के मुताबिक ऐसे 7 राज्य हैं जहां मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है। अब ऐसे राज्यों पर हज यात्रा की सब्सिडी राज्य की तरफ से शुरु करने का दबाव पड़ेगा क्योंकि देश के कई राज्य हिंदुओं की चारधाम और कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा के लिए राज्य के कोटे से सब्सिडी दे रहे हैंं।

इस गेम का सबसे बड़ा असर मुस्लिम बहुल आवादी यूपी में करीब 3.84 करोड़ मुसलमान हैं जो राज्य की आबादी का 19 फीसदी है। हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की सबसे अधिक संख्या यूपी के मुसलमानों की ही है ऐसे में केंद्र सरकार के इस फैसला का सबसे ज्यादा असर यूपी के मुस्लिम समुदाय पर ही पड़ेगा। इस फैसले को बदलने को लेकर आवाज भी उठाई जाएगी। यह बात और है कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी इस गेम पर क्या फैसला लेते हैं यह देखने वाली बात होगी क्योंकि वे पहले भी कई ऐसे फैसले ले चुके है जिसका मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया था।

उधर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीती अब देखने वाली होगी। ममता तीन तलाक का भी विरोध करती रही है।अब हज सब्सिडी को लेकर फिर राजनीति करने का मौका उन्हें मिल जाएगा। बंगाल की सत्ता में काबिज रहने के लिए ममता जानती हैं कि 30 फीसदी मुस्लिम वोटरों के समर्थन के बिना उसके सपने पूरे नहीं हो सकते। ऐसे में ममता सरकार मुस्लिम समुदाय को राज्य कोटे से सब्सिडी देकर एक बड़ा दांव खेल सकती है।

केरल की कुल साढ़े तीन करोड़ आबादी में 25 प्रतिशत से अधिक मुसलमान आबादी है जिसे खुश करने के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन मुसिलमों को सब्सिडी का तोहफा दे सकती है। बिना मेहरम हज यात्रा के लिए सबसे अधिक आवेदन केरल से ही आए हैं।।देश के किसी भी राज्य के मुकाबले जम्मू और कश्मीर में मुस्लिम आबादी का अनुपात सबसे अधिक है। पीडीपी इस बड़ी आबादी को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती। देखना होगा कि पीडीपी बीजेपी के सहयोग से इस राजनीती को कैसे साध पाती है। हज सब्सिडी को लेकर दिल्ली सरकार के मुखिया भी मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए हज सब्सिडी देने की राजनीति जारी रख सकते हैं दिल्ली में करीब 12 फीसदी मुस्लिम आवादी है जो अभी आप के साथ खड़ी दिख रही है।

बिहार में मुसलमान आबादी पूरे राज्य में बिखरी हुई है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार बिहार में मुसलमान आबादी क़रीब 17 फ़ीसदी है। राज्य की 243 विधानसभा क्षेत्रों में से क़रीब 50 विधानसभा सीटों पर मुसलमानों के वोट निर्णायक माने जाते हैं। ऐसे में इस खास तबके पर सबकी निगाह टिकी रहती है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुस्लिम समुदाओं को खुश करने को मौका नहीं छोड़ते लेकिन अबकी बार उनके लिए यह राह आसान नहीं है। असम में चुनावी नतीजों पर असर डालने में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका हमेशा ही अहम रही है। पूर्वोत्तर के सबसे बड़े सूबे असम में मुस्लिम आबादी 34 फीसदी है। असम में अभी चुनाव नहीं है लेकिन लोक सभा चुनाव को देखते हुए असम की बीजेपी सरकार कुछ फैसला जरूर लेगी ताकि बीजेपी की राजनीती ख़राब नहीं हो।

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