चुनाव आयोग का निर्देश : मध्‍यप्रदेश में तीन साल से एक जगह पदस्थ अफसरों को 28 फरवरी तक हटाएं

भोपाल। प्रदेश में तीन साल से एक जगह पदस्थ कलेक्टर से लेकर नायब तहसीलदार और पुलिस अधीक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी हटाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को 28 फरवरी तक यह कार्रवाई पूरे कराने के आदेश दिए हैं। इस दायरे में 31 मई 2019 को तीन साल पूरा करने वाले अफसर आएंगे। साथ ही वे अधिकारी भी बदले जाएंगे, जिन्होंने अगस्त 2017 के पहले हुए चुनाव में सीधी भूमिका निभाई हो।

चुनाव आयोग के प्रमुख सचिव नरेंद्र एन. बुटोलिया ने पिछले सप्ताह मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रशासनिक जमावट को लेकर दिशा-निर्देश दिए। इसमें कहा गया कि कोई भी ऐसा अधिकारी मैदानी पदस्थापना में न रखा जाए, जिसे चुनाव आयोग के निर्देश पर हटाया गया हो या जिस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई हो।

चार साल की अवधि में तीन साल से एक स्थान पर काम कर रहे जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, अतिरिक्त कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, आईजी, डीआईजी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, कमांडेंट, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक, थानेदार, रक्षित निरीक्षक और सहायक उप निरीक्षक को बदला जाएगा।

पुलिस विभाग की विशेष शाखा, प्रशिक्षण और कम्प्यूटराइजेशन के काम में लगे अधिकारी भी आयोग के प्रावधान के दायरे में आएंगे। पिछले लोकसभा चुनाव में पदस्थ अधिकारी को भी बदला जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि विभागों को यह कार्रवाई 28 फरवरी तक पूरी करनी होगी। मार्च के पहले सप्ताह में इसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग ने मांगी है।

छोटा जिला हो तो दूसरे में करें तबादला

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यदि उप निरीक्षक तीन साल से एक ही जगह पदस्थ हैं तो उसे दूसरे सब डिवीजन में पदस्थ किया जाए। यह सब डिवीजन उस विधानसभा क्षेत्र का नहीं होना चाहिए, जहां वह पहले पदस्थ रहा हो। ऐसी सूरत में यदि जिला छोटा है तो फिर उसका दूसरे जिले में तबादला किया जाए। गृह जिले में पदस्थापना नहीं होनी चाहिए।

मुख्यालय पर पदस्थ अफसरों पर लागू नहीं होंगे निर्देश

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि चुनाव आयोग के तबादला संबंधी ताजा निर्देश मुख्यालय में पदस्थ अफसरों पर लागू नहीं होंगे। जिन अधिकारियों को सेक्टर या जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया था, वे भी इस दायरे में नहीं आएंगे।

मेरा कोई रिश्तेदार चुनाव मैदान में नहीं

नामांकन दाखिल होने के दो दिन बाद चुनाव ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों को घोषणा करनी होगी कि उनका कोई नजदीकी रिश्तेदार चुनाव नहीं लड़ रहा है। इस घोषणा पत्र में यह भी बताना होगा कि उनपर कोई आपराधिक मामला किसी अदालत में लंबित है या नहीं।

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