चौकिये मत ! यूपी और बिहार में अपहरण कर शादी का धंधा चोखा है

अखिलेश अखिल

कहने के लिए हमारे नेता-अधिकारी तो कई विषयों पर भाषण देते फिरते हैं और कानून बनाते रहते हैं लेकिन सबसे ज्यादा क़ानून का उलंघन और असामाजिक काम हिंदी पट्टी में ही देखने को मिलता है। नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और असम में 50 प्रतिशत अपहरण शादी के लिए हुए हैं । इन राज्यों में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 7,338 महिलाओं को अगवा किया गया। यानी महिलाओं का अपहरण कर जबरन विवाह करने का खेल। आजाद और सभ्य समाज का यह घिनौना खेल आज भी जारी है लेकिन किसी का इसपर बस नहीं चल रहा कि इसे रोक दे। ऐसा नहीं है कि प्रदेश के नेताओं ,अधिकारियों और समाज सेवको को इस खेल की जानकारी नहीं। कोई ऐसा भी नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है। सालों से यह खेल जारी है और समाज ,सरकार मौन बैठा सब देख रहा है। अपहरण जैसे अपराध में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। उधर यूपी का सगा भाई बिहार में अपहरण के 4,641 मामले सामने आये हैं। बिहार में जबरन विवाह से संबंधित अपहरण का ग्राफ 70 प्रतिशत है। असम में 3,883 लोगों का अपहरण हुआ। इस डेटा के साथ असम में अपहरण की दर सबसे ऊंची है। राष्ट्रीय अपराध रिपोर्ट के अनुसार अपहरण के आंकड़ों का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार राज्य का है।

उधर बिहार की कहानी तो कुछ और भी अजूबा है। नीतीश सरकार दहेज़ विरोधी और बाल विवाह विरोधी अभियान तो खूब चला रहे हैं लेकिन जबरिया शादी को रोक पाने में असफल है। सच तो यही है कि यह जबरिया शादी बिहार के कुछ इलाकों की संस्कृति बन गयी है। हर साल यहाँ हजारों की तादात में ऐसी शादी की जाती है और क़ानून कुछ नहीं कर पाता। बिहार में हर साल करीब तीन हजार अपहरण शादी के लिये किये जा रहे हैं। पुलिस विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। पिछले साल 2017 में तीन हजार चार सौ पांच दूल्हे का अपहरण करके उसे विवाह के लिये मजबूर किया गया। इस तरह के विवाह को ‘पकड़ुवा विवाह’ कहा जाता है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो लगातार यह संख्या बढ़ी है।

2016 में 3070 युवकों का अपहरण शादी के लिए किया गया। 2015 में 3000 तो 2014 में 2526 दूल्हों का अपहरण हुआ और दुल्हन के परिजनों ने बंदूक की नोक पर विवाह के लिये मजबूर किया। एक अनुमान के मुताबिक बिहार में औसतन प्रतिदिन ऐसी नौ शादियां हो रही हैं। अपहरण कर शादी करने की वारदातों को दहेज से भी जोड़कर देखा जाता है। अब शादी का मौसम आते ही अपहरण का धंधा तेज हो गया है। पढ़े लिखे और नौकरी करने वाले युवक का अपहरण कर लिया जाता है और जबरन उसकी शादी कर दी जाती है। शादी के लिए अपहरण करने वाले लोगों की एक फ़ौज बिहार में बन गयी है। माल दो और दूल्हे का पता बताओ और दूल्हा को हाथ पैर बाँध कर हाजिर कर दिया जाता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था पर लगाम लगानी चाहिए।

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