जंगलों में अब प्यासे नहीं रहेंगे जानवर

लखनऊ: गर्मी में जानवरों की प्यास बुझाने के लिए वन विभाग ने जंगलों में बनाये गये छोटे-छोटे तालाबों में पानी भरने का कार्य शुरू कर दिया है। इन तालाबों में पानी पीकर जानवर अपनी प्यास बुझाएंगे। वन विभाग का मानना है कि जंगल में पानी की उपलब्धता से जीव-जन्तुओं का पलायन रुकेगा, साथ ही उनके अवैध शिकार पर भी रोक लगेगी। अवध वन प्रभाग के डीएफओ मनोज सोनकर बताते हैं कि सभी वन क्षेत्राधिकारियों के निर्देश दिया गया है कि वह तालाबों की नियमित रूप से निगरानी करें तथा पानी कम होते ही उन्हें तत्काल पानी से भर दें।

राजधानी के छह वन क्षेत्रों में लगभग दस हजार हेक्टेयर संरक्षित जंगल मौजूद है। माल, मलिहाबाद व रहमानखेड़ा के जंगलों में बेता नाला व गोमती के पानी से जंगली जानवर अपनी प्यास बुझाते हैं। अधिकतर जंगली क्षेत्रों में जल स्रेत के रूप में तालाब व छोटे नाले ही मौजूद हैं। गर्मी के मौसम तालाब व नालों का पानी समाप्त हो जाता है। पानी की तलाश में जंगली जानवर जंगल से बाहर निकलने पर मजबूर हो जाते हैं। यही हाल जंगलों में रहने वाले हिरनों का है जो पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलते हैं। जंगल से निकलते ही वह कुत्तों व शिकारियों द्वारा मार दिये जाते हैं।

जानवरों को बचाने के लिए अवध वन प्रभाग ने उन जंगलों में छोट-छोटे तालाब बनाये हैं जहां पर पानी की उपलब्धता नहीं है। इन तालाबों में टैकर व टय़ूबवेल से पानी भरा जा रहा है। जंगल में रहने वाले जानवर इन्हीं तालाबों से अपनी प्यास बुझाने के साथ ही जल क्रीड़ा भी कर सकेंगे। डीएफओ मनोज सोनकर ने बताया कि जंगल में पानी उपलब्ध होने के बाद जानवर बाहर नहीं निकलेंगे। जंगल में ही रहने से वह सुरक्षित भी रहेंगे।

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