जज्बे को सलाम! दूध बेचकर खड़ी की कंपनी और 27 की उम्र में बन गई करोड़पति

झारखंड के डाल्टनगंजकी रहने वाली एक लड़की ने बेंगलुरू में अच्छी क्वालिटी का दूध न मिलने पर उसका बिजनेस करने की सोची थी। उसने नहीं सोचा था कि ये बिजनेस उसे एक दिन करोड़पति बना देगा। साल 2012 में शिल्पी सिन्हा बेंगलुरू पढ़ने के लिए गई थीं। वहां उन्हें गाय का शुद्ध दूध नहीं मिल पाता था। वहां लोग गायों को पालने के लिए उन्हें कचरा खिलाते थे। ये सब जानकर शिल्पी ने यहीं से दूध का बिजनेस करने का फैसला लिया। लेकिन महिला और कंपनी की इकलौती फाउंडर के तौर डेयरी क्षेत्र में काम करना आसान न था।

जज्बे को सलाम! दूध बेचकर खड़ी की कंपनी और 27 की उम्र में बन गई करोड़पति
द मिल्क इंडिया कंपनी में गाय का शुद्ध दूध मिलता है। इसे बनाने में कोई भी मिलावट नहीं की जाती है। ये कम्पनी बेंग्लुरू में स्थित सरजापुर के 10 किलोमीटर के एरिया में 62 रुपये प्रति लीटर पर दूध बेचती है। गाय का दूध बच्चों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है। इससे उनके शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है।

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किसान गायों को रेस्टोरेंट का बचा खाना खिलाते थे। तब उन्हें उसके नुकसान बताए। रेस्टोरेंट के बचे खाने से गाय के दूध पर असर पड़ता है। इसके बाद किसानों ने गायों को मक्का खिलाना शुरू किया. इतना ही नहीं शिल्पी बताती हैं। हमारी कम्पनी गायों के भी स्वास्थय का ख़्याल रखती है। उनकी दैहिक कोशिकाओं की गणना मशीन के ज़रिए की जाती है। दैहिक कोशिका की, संख्या जितनी कम होगी, दूध उतना ही अच्छा होगा।

उनकी कंपनी एक से आठ साल तक के बच्चों के लिए ही दूध बेचती है क्योंकि इसी उम्र में बच्चों का शारीरिक विकास होता है। हमें नौ या दस महीने के बच्चों के ऑर्डर ज़्यादा मिलते हैं। किसी भी ऑर्डर को लेने से पहले हम माताओं से बच्चे की उम्र ज़रूर पूछते हैं और अगर बच्चा एक साल का नहीं है तो डिलीवरी नहीं देते हैं।

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शिल्पी ने अपने संघर्ष के दिनों के बारे में बताया। इस कम्पनी की अकेली मालिक और फ़ाउंडर होना बहुत मुश्किल का काम था। शुरुआत में गायों का दूध निकालने और उसे पैक करने के लिए मज़दूर चाहिए ते, जो नहीं मिले। इसलिए वो ख़ुद ही खेतों में काम करती थीं। अपनी सुरक्षा के लिए मिर्ची स्प्रे और चाकू रखती थीं। वो पिछले 3 सालों से अपने परिवार से दूर रहकर द मिल्क इंडिया कंपनी पर काम कर रही है, मेरी मेहनत रंग लाई है आज लोग मुझे और मेरी कम्पनी को जानने लगे हैं। इस कम्पनी को महज़ 11,000 रुपये से शुरू किया था।

जज्बे को सलाम! दूध बेचकर खड़ी की कंपनी और 27 की उम्र में बन गई करोड़पति
आज उनकी कम्पनी में तुमकुरु और बेंगलुरु के गांवों के लगभग 50 किसान और 14 मज़दूर काम करते हैं। शिल्पी की 14 लोगों की टीम उनके सर्जापुर वाले ऑफ़िस में काम करती हैं। जिन्हें वो सम्मान से ‘मिनी-फ़ाउंडर्स’ के रूप में संबोधित करती हैं।

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शिल्पी अपनी कम्पनी के ज़रिए लोगों तक बेहतर और शुद्ध प्रोडक्ट पहुंचाने की कोशिश करती हैं। वो अपनी इस कम्पनी के ज़रिए बच्चों और माताओं के जीवन में बदलवा ला सकती हैं। वो अपनी कम्पनी में सिर्फ़ दूध ही बेचना चाहती हैं।

 

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